जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई वाली राजस्थान सरकार ने एक बड़ी योजना बनाई है। इसके तहत पश्चिमी राजस्थान से लेकर गुजरात के कच्छ के रण तक 600 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसका मकसद उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी का निपटारा करना और नदियों को साफ रखना है।
नदियों को मिलेगी राहत
यह योजना खासतौर पर लूणी, जोजरी और बांडी जैसी नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाई जा रही है। जोधपुर, पाली, बालोतरा और जसोल जैसे शहरों में करीब 2000 टैक्सटाइल और स्टील फैक्ट्रियां हैं, जिनसे भारी मात्रा में गंदा पानी निकलता है। यह प्रोजेक्ट उस पानी को दूर तक ले जाकर सही तरीके से निपटाएगा।
सीएम ने उद्योग प्रतिनिधियों से की बातचीत
जयपुर में लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर औद्योगिक क्षेत्र की समस्याएं बताईं। इस पर सीएम ने बताया कि सरकार इस महत्वपूर्ण योजना पर काम कर रही है। इससे न सिर्फ प्रदूषण की समस्या हल होगी, बल्कि नए उद्योगों को बढ़ावा भी मिलेगा।
केंद्र सरकार से भी मांगी जाएगी मदद
इस योजना की लागत 1000 करोड़ रुपए से अधिक है। इसमें कुछ भाग केंद्र सरकार से सहयोग लेकर पूरा किया जाएगा।
योजना से क्या होगा फायदा:
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600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन जोधपुर, पाली से लेकर कच्छ के रण तक जाएगी।
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5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
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प्रदूषण से नदियों और गांवों को राहत मिलेगी।
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नए उद्योग लगाना आसान होगा।
अन्य प्रमुख मांगे:
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राजस्थान के पुराने 37 औद्योगिक क्षेत्रों को RIICO में शामिल करने का लंबित बिल पास करने की मांग।
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ब्यावर और भीलवाड़ा में टाइल हब बनाने का प्रस्ताव।
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कृषि भूमि को औद्योगिक रूप में बदलने के बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया आसान करने की मांग।
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पचपदरा में पेट्रो हब बनाने का सुझाव।
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माइनिंग क्षेत्रों में दोबारा ड्रोन सर्वे से समीक्षा की मांग।
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छोटे उद्यमियों को सस्ती दरों पर औद्योगिक शेड उपलब्ध कराने का अनुरोध।
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कृषि मंडी टैक्स और कृषक कल्याण सेस खत्म करने की मांग।
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रिसोर्ट और होटलों को उद्योग का दर्जा देने का आग्रह।
इस योजना से राजस्थान के उद्योगों को मजबूती मिलेगी और प्रदूषण की बड़ी समस्या का हल निकलेगा।
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