नई दिल्ली: जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है, ऐसे समय में भारत और ईरान के रिश्तों में मजबूती का संकेत देने वाली एक अहम कूटनीतिक पहल हुई है। भारत और ईरान के बीच 20वीं संयुक्त आयोग बैठक (Joint Commission Meeting) का आयोजन नई दिल्ली में किया गया, जिसमें दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति जताई।
बैठक की अध्यक्षता
इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने की। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई — जिनमें व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, संस्कृति, संपर्क और जन-से-जन संबंध शामिल थे।
आतंकवाद पर साझा रुख
बैठक के दौरान भारत ने पहलगाम आतंकी हमले की जानकारी ईरानी प्रतिनिधिमंडल को दी और इस हमले के सीमा पार संबंधों की ओर भी इशारा किया। दोनों पक्षों ने आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया। साथ ही, इस खतरे से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
महत्वपूर्ण सहमतियां और MoU
बैठक के दौरान कुछ प्रमुख क्षेत्रों में सहमति बनी:
-
चिकित्सा उत्पादों के विनियमन और सीमा शुल्क सहयोग को लेकर दो महत्वपूर्ण ज्ञापनों पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया।
-
कैदियों, मछुआरों, नाविकों और छात्रों से संबंधित मानवीय मुद्दों पर सहयोग और सहानुभूति आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी।
उच्चस्तरीय मुलाकातें
भारत दौरे के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार भेंट की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात कर रणनीतिक और सुरक्षा मामलों पर गहन विचार-विमर्श किया।
निष्कर्ष:
भारत और ईरान के बीच यह बैठक सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहराते विश्वास और साझा सुरक्षा हितों की पुष्टि करती है। इस तरह की पहलें क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती देने और भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।
CHANNEL009 Connects India
