जकार्ता: भारत की आतंकवाद के प्रति कड़ाई से कोई समझौता न करने की नीति को इंडोनेशिया ने भी पूरी तरह से समर्थन दिया है। इंडोनेशियाई संसद के वरिष्ठ नेताओं ने भारत के सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में कहा कि उनका देश भी आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाता है और इसे मानवता के खिलाफ अपराध मानता है।
भारत-इंडोनेशिया के बीच मजबूत रणनीतिक संवाद
भारतीय दूतावास द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जकार्ता में इंडोनेशियाई संसद के अंतर-संसदीय सहयोग समिति के उपाध्यक्ष मुहम्मद हुसैन फदलुल्लाह और भारत-इंडोनेशिया संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष मुहम्मद रोफिकी से मुलाकात की।
इंडोनेशिया ने साफ कहा कि वे भारत की “नो टॉलरेंस फॉर टेररिज्म” नीति का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार, आतंकवाद किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
कूटनीतिक पहल का हिस्सा है यह दौरा
यह यात्रा भारत की बहुपक्षीय कूटनीतिक पहल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का एक हिस्सा है, जिसके तहत सात संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को 33 वैश्विक राजधानियों का दौरा करने के लिए नियुक्त किया गया है। उद्देश्य है—दुनिया को यह स्पष्ट रूप से बताना कि हालिया सुरक्षा स्थिति पाकिस्तान-प्रेरित आतंकवाद की देन है, न कि भारत की सैन्य कार्रवाई की।
प्रतिनिधिमंडल में ये नेता शामिल थे:
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संजय कुमार झा (जेडीयू) – नेतृत्व में
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अपराजिता सारंगी (भाजपा)
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अभिषेक बनर्जी (टीएमसी)
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बृजलाल (भाजपा)
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जॉन ब्रिटास (माकपा)
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प्रदान बरुआ (भाजपा)
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हेमांग जोशी (भाजपा)
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सलमान खुर्शीद (कांग्रेस), पूर्व विदेश मंत्री
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मोहन कुमार, पूर्व राजदूत (फ्रांस एवं बहरीन)
दूतावास का बयान
भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,
“भारत सभी रूपों में आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और इस प्रयास के तहत अपने रणनीतिक साझेदार इंडोनेशिया से सहयोग की उम्मीद करता है।”
भारत और इंडोनेशिया का यह साझा दृष्टिकोण वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ एकीकृत रुख को दर्शाता है और यह भारत की कूटनीतिक रणनीति को मजबूती प्रदान करता है।
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