22 अप्रैल 2025, जेद्दा:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दो दिवसीय दौरे पर जेद्दा पहुँच चुके हैं। इस यात्रा को केवल एक कूटनीतिक पहल नहीं, बल्कि भारत की खाड़ी नीति के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब खाड़ी देशों और भारत के बीच व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते तेज़ी से गहराते जा रहे हैं, वहीं पाकिस्तान की पारंपरिक खाड़ी साझेदारी फीकी पड़ती दिख रही है।
पाकिस्तान की चिंता और सऊदी का बदलता रुख
पीएम मोदी के आगमन से ठीक पहले, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने सियालकोट में टिप्पणी करते हुए कहा कि सऊदी अरब ने 4700 पाकिस्तानी भिखारियों को देश वापस भेजा है। यह बयान न केवल पाकिस्तान की बढ़ती असहजता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि खाड़ी देशों में अब पाकिस्तान की रणनीतिक अहमियत कम हो रही है।
पाक विश्लेषक क़मर चीमा ने इस यात्रा को लेकर खुलकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “भारत अरबों डॉलर के व्यापार और निवेश की बातें कर रहा है और हम खाड़ी देशों को मज़हबी भाईचारे की दुहाई दे रहे हैं।” चीमा ने साफ़ कहा कि भारत का सऊदी अरब के साथ बढ़ता व्यापार और रणनीतिक सहयोग पाकिस्तान के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
भारत की गहराती खाड़ी कूटनीति
भारत का खाड़ी देशों के साथ व्यापार 2023-24 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा है। यूएई, भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन चुका है, और दोनों के बीच व्यापार 80 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। फरवरी में क़तर और दिसंबर 2024 में कुवैत के साथ भी भारत ने कई अहम समझौते किए।
ओमान की राजधानी मस्कट में आयोजित इंडियन ओशियन कॉन्फ़्रेंस में भारत की मौजूदगी और पाकिस्तान की अनुपस्थिति इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
रणनीतिक साझेदारी का नया दौर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल ऊर्जा और प्रवासी कामगारों तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों के लिए एक स्थिर, भरोसेमंद और बड़ा आर्थिक भागीदार बन चुका है। दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद मुदस्सिर क़मर के अनुसार, “मोदी सरकार ने खाड़ी नीति को नया विस्तार दिया है। यह केवल लेन-देन का नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का रिश्ता बन चुका है।”
पाकिस्तान की पुरानी दोस्ती का वर्तमान संकट
एक समय था जब सऊदी अरब पाकिस्तान को अपना सबसे करीबी रणनीतिक सहयोगी मानता था। 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद सऊदी समर्थन की यादें अब इतिहास बनती जा रही हैं। आज पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ धार्मिक जुड़ाव की दुहाई तो देता है, लेकिन बदलते समय में धार्मिक संबंधों से ज़्यादा प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता और विकास को दी जा रही है।
गल्फ़ का नया फ़ोकस: भारत
भारत की खाड़ी नीति अब पाकिस्तान की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होती। मोदी सरकार की नीतियों ने इस क्षेत्र में पाकिस्तान को हाशिए पर धकेल दिया है। चाहे नागरिकता संशोधन कानून हो या जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाना—इन मुद्दों पर सऊदी और यूएई का भारत से संबंध नहीं बिगड़ा, बल्कि और मज़बूत हुआ।
पाकिस्तान को आत्ममंथन की ज़रूरत
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पूर्व प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने भी यह स्वीकार किया कि भारत के साथ खाड़ी देशों के रिश्ते उनकी आर्थिक प्राथमिकताओं के कारण हैं। उन्होंने पाकिस्तान से आग्रह किया कि उसे खुद को एक स्थिर और आकर्षक देश बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि वैश्विक समुदाय उसमें निवेश और व्यापार के अवसर देख सके।
निष्कर्ष:
आज जब भारत खाड़ी क्षेत्र में मज़बूती से आगे बढ़ रहा है, पाकिस्तान को अपने पुराने धार्मिक और भावनात्मक तर्कों की जगह व्यावहारिक और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाना होगा। खाड़ी के देशों के लिए अब भारत एक भरोसेमंद, बड़ा और प्रभावशाली साझेदार बन चुका है—और पाकिस्तान की भूमिका, पहले जैसी नहीं रही।
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