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भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि डेयरी बोर्ड ने बिना अध्यक्ष के अपना पूरा कार्यकाल पूरा किया है। 9 अप्रैल को संचालक मंडल का कार्यकाल खत्म हो गया है। इसके बाद 10 अप्रैल से जिला कलेक्टर डेयरी के प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। इस बीच कुछ लोग चुनाव को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी भी कर रहे हैं।
निदेशकों के भरोसे चलता रहा काम
पिछले कुछ सालों में जब भी बोर्ड की बैठक हुई, तो मौजूद निदेशकों में से ही किसी एक को अस्थायी अध्यक्ष बनाकर जरूरी फैसले लिए गए। इसी तरह डेयरी का काम चलता रहा।
हजारों सदस्य, लेकिन वोटर सिर्फ 200
जिले की करीब 1200 दुग्ध समितियां डेयरी से जुड़ी हैं और लगभग 60 हजार पशुपालक इससे जुड़े हुए हैं। लेकिन जब संचालक मंडल के 11 सदस्यों का चुनाव होता है, तो वोट देने का अधिकार केवल करीब 200 लोगों के पास ही होता है। यही लोग पूरे डेयरी सिस्टम का फैसला करते हैं।
इस्तीफे के बाद नहीं हुए नए चुनाव
डेयरी के इतिहास में कई बार प्रशासक और अध्यक्ष रहे हैं। रामलाल जाट 4 बार अध्यक्ष रह चुके हैं। पांचवीं बार चुने जाने के बाद जब वे राजस्व मंत्री बने, तो उन्हें नियमों के तहत पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने दिसंबर 2021 में अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
चार साल से खाली है अध्यक्ष की कुर्सी
8 अप्रैल 2021 को चुनाव हुए थे और 10 अप्रैल 2021 को रामलाल जाट अध्यक्ष बने थे। लेकिन 21 नवंबर 2021 को मंत्री बनने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया। तब से लेकर अब तक करीब साढ़े चार साल से डेयरी बिना अध्यक्ष के ही चल रही है और सिर्फ संचालक मंडल के भरोसे काम हो रहा है।
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