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महाराष्ट्र समाचार:
राज्य सरकार ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने ऐलान किया है कि जिन बांग्लादेशियों को फर्जी तरीके से जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उनकी जांच एक टास्क फोर्स करेगी और 15 अगस्त 2025 तक सभी फर्जी प्रमाण पत्र रद्द कर दिए जाएंगे।
✅ अब तक 42 हजार से ज़्यादा फर्जी प्रमाण पत्र का पता
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि अब तक ऐसे 42,000 से अधिक मामलों का पता चला है, लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि फर्जी प्रमाण पत्रों की पहचान करके कार्रवाई की जाए।
🔍 टास्क फोर्स करेगी जांच
सरकार ने इसके लिए एक टास्क फोर्स बनाई है, जो सभी संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों की जांच करेगी।
राजस्व और स्वास्थ्य विभाग को ये रिपोर्ट भेजी जाएगी ताकि सरकारी रिकॉर्ड ठीक किया जा सके और दोषियों पर सख्त एक्शन लिया जा सके।
📌 कहां मिले सबसे ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्र?
पूर्व सांसद किरिट सोमैया के मुताबिक, पिछले दो महीनों में ही 42,191 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए जा चुके हैं।
सबसे ज्यादा मामले इन जिलों में सामने आए:
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अकोला : 3,948 फर्जी प्रमाण पत्र
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अमरावती : 2,823 मामले
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नागपुर और मालेगांव में भी बड़ी संख्या में फर्जीवाड़ा
⚠️ किसने जारी किए फर्जी प्रमाण पत्र?
सोमैया ने आरोप लगाया कि यह जन्म प्रमाण पत्र घोटाला वर्ष 2024 में हुआ था।
नायब तहसीलदार, जिन्हें जन्म प्रमाण पत्र देने का अधिकार नहीं है, उन्होंने ही लगभग 40 हजार बांग्लादेशी नागरिकों को प्रमाण पत्र जारी कर दिए।
🚫 महाराष्ट्र सरकार का संदेश साफ
सरकार ने कहा है कि अब किसी भी अवैध घुसपैठिए को बख्शा नहीं जाएगा। महाराष्ट्र में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों के लिए कोई जगह नहीं है।
निष्कर्ष:
महाराष्ट्र सरकार का यह कदम राज्य को अवैध घुसपैठ और फर्जीवाड़े से सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
15 अगस्त तक होने वाली इस जांच से हजारों फर्जी दस्तावेज रद्द होने की संभावना है।
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