चाइल्ड केयर लीव ना मिलने पर दायर याचिका का मामला
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट से जवाब मांगा है, जहां एक महिला एडिशनल जिला जज ने चाइल्ड केयर लीव (बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी) न मिलने और फिर ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) में की गई नकारात्मक टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई है।
क्या है मामला?
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याचिकाकर्ता महिला जज अनुसूचित जाति वर्ग से हैं और सिंगल मदर हैं।
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उन्होंने जून से दिसंबर तक 194 दिन की छुट्टी मांगी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सिर्फ 92 दिन की छुट्टी ही मंजूर की।
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इसके विरोध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की।
ACR में क्या हुआ?
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याचिका दायर करने के बाद उनकी ACR में ‘परफॉर्मेंस काउंसलिंग’ जैसी टिप्पणी की गई।
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जबकि उनका अब तक का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है – उन्होंने 4,660 केस निपटाए हैं।
कोर्ट की कार्यवाही:
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि ACR की यह बात मूल याचिका से अलग है, इसलिए इसके लिए अंतरवर्ती आवेदन (IA) देना चाहिए।
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महिला जज ने IA दाखिल किया और कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट की दलील:
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हाईकोर्ट ने हलफनामे में कहा कि 10 जून से 9 सितंबर 2025 तक 92 दिन की छुट्टी मंजूर कर दी गई है।
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हाईकोर्ट के वकील ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव के नियमों के मुताबिक 730 दिन की छुट्टी पूरे करियर में मिलती है, एक बार में नहीं।
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साथ ही, जज उस जिले की मुख्य न्यायिक अधिकारी हैं, और लंबी छुट्टी से न्यायिक कामकाज प्रभावित हो सकता है।
अगली सुनवाई:
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में होगी।
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