मानसून 8 जून से अटका, लगातार तीसरे साल लंबा ब्रेक: MP, UP और राजस्थान में 22 जून के बाद एंट्री के आसार
नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मानसून 8 जून के बाद से लगभग ठहराव की स्थिति में है और लगातार तीसरे वर्ष मानसून में लंबा ब्रेक देखने को मिल रहा है। इसका असर खासतौर पर कृषि क्षेत्र और खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ने लगा है। कई राज्यों के किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मौसम वैज्ञानिक आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार की उम्मीद जता रहे हैं।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में मानसून की प्रगति फिलहाल धीमी है। अनुमान है कि इन क्षेत्रों में मानसून 22 जून के बाद सक्रिय रूप से प्रवेश कर सकता है। इसके चलते इन राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है और तापमान भी कई जगहों पर औसत से अधिक बना हुआ है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, देशभर में अब तक सामान्य से करीब 37.8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। यह कमी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्यों के लिए चिंता का विषय बन गई है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे धान, सोयाबीन, कपास और मक्का समय पर बारिश पर निर्भर करती हैं। ऐसे में मानसून की देरी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं होती, तो कई क्षेत्रों में बुवाई का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। हालांकि, उन्होंने किसानों को जल्दबाजी में बुवाई न करने और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।
मौसम विभाग का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रही नई मौसमी परिस्थितियों के कारण मानसून को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जून के अंतिम सप्ताह में बारिश की गतिविधियों में तेजी देखने को मिल सकती है।
देश के कई हिस्सों में लोग भीषण गर्मी और उमस से परेशान हैं और मानसून के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 7 से 10 दिन मानसून की दिशा और गति तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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