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मुरैना में अधूरी पड़ी संजीवनी क्लीनिक, लोगों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधा

मुरैना: जिले में संजीवनी क्लीनिकों का निर्माण अधूरा पड़ा है और कई जगहों पर यह शुरू भी नहीं हो सकी हैं। सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए इन क्लीनिकों की योजना बनाई थी, लेकिन अब तक 50% से भी कम क्लीनिक शुरू हो पाई हैं। जिन क्लीनिकों की इमारत बन चुकी है, वहां स्टाफ की कमी की वजह से उद्घाटन नहीं हो रहा

क्या था संजीवनी क्लीनिक का उद्देश्य?

सरकार का मकसद जिला अस्पतालों पर भीड़ कम करना और लोगों को घर के पास ही इलाज की सुविधा देना था। लेकिन कई क्लीनिकों के लिए जमीन नहीं मिली और जहां निर्माण हुआ, वहां डॉक्टर व स्टाफ नहीं हैं

कहां बनीं क्लीनिक, कहां पड़ी अधूरी?

  • शहर के लिए 15 क्लीनिक स्वीकृत हुई थीं, जिनमें से 8 चालू हो गईं और 7 अब भी पेंडिंग हैं
  • मुरैना गांव (वार्ड 6), एसपी बंगला (वार्ड 13), लालौर कला (वार्ड 3), सिंगल बस्ती (वार्ड 20) – यहां काम अब तक शुरू नहीं हुआ।
  • शिकारपुर (वार्ड 35) और संजय कॉलोनी (वार्ड 42) – अभी तक जमीन भी तय नहीं हो सकी।
  • कमिश्नर कॉलोनी (वार्ड 12) – इमारत बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ नहीं होने से क्लीनिक चालू नहीं हुई।
  • अंबाह और नूराबाद बानमोर – यहां क्लीनिक का काम रुका हुआ है।
  • कैलारस और पोरसा में एक-एक क्लीनिक चालू हो चुकी है, जबकि पोरसा की दूसरी क्लीनिक और सबलगढ़ की दो क्लीनिकें अब भी पेंडिंग हैं

स्टाफ की कमी और इलाज में दिक्कतें

  • वार्ड 12 (कमिश्नर कॉलोनी)एक साल से बिल्डिंग बनी हुई है, लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने की वजह से क्लीनिक शुरू नहीं हुई
  • वार्ड 10 (जौरी) – क्लीनिक तो चल रही है, लेकिन अक्सर देर से खुलती है और दोपहर 1:30-2 बजे ही बंद हो जाती है

लोगों की परेशानी

👉 मुन्नालाल शर्मा (कमिश्नर कॉलोनी): “वार्ड 12 में संजीवनी क्लीनिक की बिल्डिंग बने एक साल हो गया, लेकिन डॉक्टर नहीं होने की वजह से अब तक इलाज शुरू नहीं हुआ।”
👉 विवेक पाठक (जौरी): “संजीवनी क्लीनिक देर से खुलती और जल्दी बंद हो जाती है, जिससे मरीजों को सही समय पर दवा और इलाज नहीं मिल पाता।”

अधिकारियों का क्या कहना है?

➡️ सीएमएचओ डॉ. पदमेश उपाध्याय: “संजीवनी क्लीनिक इसलिए बनाई गई थी कि सरकारी अस्पतालों पर भीड़ कम हो और लोगों को नजदीक स्वास्थ्य सुविधा मिले। लेकिन कमिश्नर कॉलोनी की क्लीनिक इसलिए चालू नहीं हो पाई, क्योंकि भोपाल से डॉक्टर एलॉट नहीं हुए हैं। संजय कॉलोनी की क्लीनिक में थोड़ा काम बाकी है, इसलिए वह भी रुकी हुई है।”

➡️ भूमि न मिलने की समस्या: जिन क्लीनिकों की बिल्डिंग नहीं बनी, उनके लिए कलेक्टर से बात की गई है। जैसे ही जमीन मिलेगी, काम शुरू कर दिया जाएगा।

निष्कर्ष:

मुरैना में संजीवनी क्लीनिकों की योजना अधूरी पड़ी हैकहीं निर्माण ही नहीं हुआ, तो कहीं स्टाफ की कमी है। जनता को अब भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजार है और सरकार से उम्मीद है कि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

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