न्यूयॉर्क:
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को “आर्थिक युद्ध की एक साजिश” बताया और कहा कि इस तरह की घटनाएं कश्मीर के पर्यटन उद्योग को बर्बाद करने के इरादे से की जाती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की तरफ से आने वाले आतंक पर भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेलिंग के डर से प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटेगा।
🔹 ट्रंप का दावा और जयशंकर की प्रतिक्रिया
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मई में बढ़े तनाव को “व्यापार संबंधी कुछ फोन कॉल्स” के जरिए शांत कराया। लेकिन विदेश मंत्री जयशंकर ने Newsweek को दिए गए एक इंटरव्यू में इसे पूरी तरह नकार दिया।
“मैं खुद उस कमरे में मौजूद था जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 9 मई की रात फोन किया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान भारत पर बड़ा हमला कर सकता है… लेकिन पीएम ने धमकियों को कोई तवज्जो नहीं दी,” जयशंकर ने बताया।
🔹 भारत का जवाब, पाकिस्तान की अपील
जयशंकर ने बताया कि 9 मई की रात पाकिस्तान ने वास्तव में हमला किया, लेकिन भारत ने तुरंत और सख्ती से जवाब दिया। इसके बाद 10 मई को अमेरिकी विदेश मंत्री से बात हुई और उसी दिन दोपहर में पाकिस्तान के डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने भारतीय समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को कॉल कर संघर्षविराम की अपील की।
“मैं सिर्फ वही बता सकता हूं जो मैंने प्रत्यक्ष अनुभव किया,” जयशंकर ने स्पष्ट कहा।
🔹 आतंक और कूटनीति
जयशंकर ने बताया कि पहलगाम हमला केवल आतंक नहीं, आर्थिक और सांप्रदायिक उकसावे का प्रयास था। “पर्यटकों को उनकी पहचान पूछकर मारा गया। इसका मकसद धार्मिक हिंसा भड़काना और पर्यटन को खत्म करना था,” उन्होंने कहा।
“हम यह सहन नहीं कर सकते कि आतंकवादी सीमा पार से खुलेआम काम करें और जवाब देने से हम रुक जाएं,” उन्होंने जोड़ा।
🔹 ट्रंप की “ट्रेड कॉल” की कहानी
इसके बावजूद ट्रंप ने नीदरलैंड्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को यह कहकर रोका:
“अगर तुम लड़ाई करोगे, तो व्यापार नहीं होगा।”
लेकिन जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और कूटनीति अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, और उस समय व्यापार का कोई ज़िक्र ही नहीं हुआ।
“व्यापारिक दल अपने काम में व्यस्त थे – नंबर, उत्पाद और समझौते की शर्तों को लेकर, और वो पूरी तरह पेशेवर और केंद्रित हैं,” उन्होंने कहा।
निष्कर्ष:
विदेश मंत्री जयशंकर की टिप्पणी यह स्पष्ट करती है कि भारत ने किसी विदेशी दबाव में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मसम्मान के आधार पर कार्रवाई की। वहीं ट्रंप का दावा एकतरफा प्रतीत होता है जिसे भारतीय पक्ष ने सिरे से नकार दिया है।
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