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रिपोर्ट: मधुसूदन शर्मा, राजसमंद
राजस्थान सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करते हुए “मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान” की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत अब स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति मोबाइल ऐप के ज़रिए दर्ज की जाएगी।
क्या है यह नई व्यवस्था?
अब सरकारी स्कूलों में बच्चों की हाजिरी मैन्युअल रजिस्टर में नहीं, बल्कि “शिक्षक एप्प” के माध्यम से दर्ज होगी। यह ऐप शाला दर्पण पोर्टल से जुड़ा हुआ है। इसमें नया विकल्प जोड़ा गया है – ‘विद्यार्थी उपस्थिति’।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
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हर शिक्षक अपनी स्टाफ आईडी से लॉगिन करेगा और अपनी कक्षा चुनेगा।
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प्रार्थना सभा में ही मोबाइल ऐप से अनुपस्थित बच्चों को चिन्हित करना होगा।
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यह जानकारी सीधा शाला दर्पण पोर्टल में रिकॉर्ड हो जाएगी।
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यह हाजिरी स्कूल से लेकर ब्लॉक, ज़िला और राज्य स्तर तक के अधिकारियों को रियल टाइम में दिखेगी।
पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुआ प्रयोग
शुरुआत में इस सिस्टम को स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल (134 स्कूल) और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों (205 स्कूल) में लागू किया गया। सफलता मिलने के बाद अब यह पूरे राज्य के सरकारी स्कूलों में लागू कर दिया गया है।
किसका क्या काम होगा?
संस्था प्रधान (मुख्याध्यापक)
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सभी शिक्षकों के मोबाइल में ऐप डाउनलोड और इंस्टॉल करवाना।
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हर दिन उपस्थिति दर्ज होना सुनिश्चित करना।
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अनुपस्थित शिक्षक की कक्षा की हाजिरी खुद भरना।
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सही कक्षा-शिक्षक की मैपिंग कराना।
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सभी हाजिरी की सत्यता जांचना।
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प्रार्थना सभा में ही उपस्थिति दर्ज कराने का पालन करवाना।
कक्षाध्यापक (कक्षा के शिक्षक)
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यह जांचना कि सभी छात्र ऐप में सूचीबद्ध हैं। यदि नहीं हैं तो प्रपत्र 09 भरें।
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प्रार्थना सभा में ही हाजिरी दर्ज करें।
शाला दर्पण प्रभारी
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पोर्टल पर दोबारा उपस्थिति भरने की ज़रूरत नहीं होगी।
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पहले पीरियड में ही अनुपस्थित छात्रों की जानकारी मुख्याध्यापक को देना।
उच्च अधिकारी (ब्लॉक, ज़िला, संभाग स्तर पर)
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यह सुनिश्चित करना कि सभी स्कूलों में ऐप से उपस्थिति दर्ज हो रही है।
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ऐप और वेब से स्टूडेंट डेली अटेंडेंस रिपोर्ट देखना।
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निरीक्षण के समय ऐप के सही उपयोग और समय का रिकॉर्ड जांचना।
डिजिटल हाजिरी से क्या फायदे होंगे?
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कागज़ी रजिस्टर की झंझट खत्म।
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व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
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राज्य स्तर पर रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।
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छात्रों की उपस्थिति पर आसानी से नज़र रखी जा सकेगी।
अब छात्रों की ‘गिनती’ सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में मोबाइल स्क्रीन पर एक क्लिक पर होगी। यह एक बड़ा और सराहनीय कदम है राजस्थान की डिजिटल शिक्षा की ओर।
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