कीव/मॉस्को:
रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। यूक्रेनी सेना ने बीते 72 घंटों में रूस पर दूसरा बड़ा हमला करते हुए क्रीमिया ब्रिज को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में 1100 किलोग्राम का अंडरवाटर विस्फोटक इस्तेमाल किया गया, जिससे ब्रिज के ढांचे को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, नुकसान की सटीक तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।
यह पुल, जिसे केर्च ब्रिज भी कहा जाता है, रूस को कब्ज़े वाले क्रीमिया क्षेत्र से जोड़ता है। यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन में भारी मात्रा में TNT विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया और पुल को निशाना बनाकर रूसी सैन्य आपूर्ति और मनोबल पर सीधा प्रहार किया गया है।
रूस की सैन्य लॉजिस्टिक्स पर सीधा असर
क्रीमिया ब्रिज न केवल प्रतीकात्मक रूप से, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पुल रूसी सेना की हथियार, रसद और सैनिकों की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, जो दक्षिणी यूक्रेन और क्रीमिया में ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होता है। इसे नुकसान पहुंचाने का मतलब है – रूसी सेना की सप्लाई लाइन को गंभीर झटका देना।
पहले भी हो चुके हैं हमले
यह पहली बार नहीं है जब क्रीमिया ब्रिज को निशाना बनाया गया हो। पिछले एक साल में कई बार ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए यूक्रेन ने इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। लेकिन इस बार का हमला इसलिए अलग माना जा रहा है क्योंकि इसमें पानी के नीचे विस्फोट का तरीका अपनाया गया — जो अब तक दुर्लभ था।
01 जून को हुआ था हवाई हमला
इससे पहले 1 जून को यूक्रेन ने रूस के 5 सैन्य ठिकानों पर एक समन्वित ड्रोन हमला किया था। यूक्रेनी सेना ने दावा किया था कि उस ऑपरेशन में 41 रूसी लड़ाकू विमान नष्ट किए गए थे, जो युद्ध में रूस के लिए एक बड़ा नुकसान माना गया।
कब बना था यह पुल?
क्रीमिया ब्रिज का निर्माण 2018 में रूस ने किया था, ताकि 2014 में कब्जाए गए क्रीमिया को सीधे तौर पर मुख्य भूमि से जोड़ा जा सके। पश्चिमी देशों और यूक्रेन के लिए यह पुल अवैध कब्जे का प्रतीक है, जबकि रूस इसे अपने नियंत्रण की वैधता का सबूत मानता है। यही कारण है कि यह पुल लगातार संघर्ष का केंद्र बना हुआ है।
नुकसान सिर्फ सैन्य नहीं, आर्थिक भी
इस पुल के जरिए केवल सैन्य सामान ही नहीं, बल्कि व्यापार, पर्यटक और आम नागरिकों की आवाजाही भी होती है। इसलिए इसे नुकसान पहुंचाने से क्रीमिया की अर्थव्यवस्था और नागरिक जीवन पर भी सीधा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह हमला रणनीतिक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक भी है — जिसका उद्देश्य रूस की स्थिति को कमजोर दिखाना है।
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