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जोधपुर – राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की भजनलाल सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी पिछली सरकार को गिराने की साजिश रची गई थी।
बीजेपी पर साजिश का आरोप
गहलोत ने कहा कि यह साजिश अमित शाह, धर्मेंद्र प्रधान और गजेंद्र सिंह शेखावत ने रची थी। उन्होंने बताया कि जैसे मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में सरकारें गिराई गईं, वैसे ही राजस्थान में भी कोशिश की गई थी, लेकिन वह नाकाम रही।
उन्होंने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) और पैसे बांटने के आरोप लगाए। गहलोत ने दावा किया कि उनके पास इसके सबूत भी हैं।
लोकतंत्र और संविधान पर चिंता
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान को खतरा है। उन्होंने सवाल किया कि जब बीजेपी संविधान दिवस मना रही है, तो क्या हॉर्स ट्रेडिंग करना संविधान के अनुसार है?
गहलोत ने आपातकाल का भी ज़िक्र किया और कहा कि कांग्रेस ने उसकी गलतियों के लिए माफी मांगी थी, लेकिन आज अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है – पत्रकारों और लेखकों को जेल में डाला जा रहा है।
कुंभ मेले में मौतों की संख्या पर आरोप
उन्होंने इलाहाबाद कुंभ मेले में मौतों की संख्या छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने 35 मौतें बताईं, जबकि बीबीसी की रिपोर्ट में 85 लोगों की मौत बताई गई।
भजनलाल सरकार पर निशाना
गहलोत ने राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता दुखी है और मुख्यमंत्री को प्रशासन की हालत समझ में नहीं आ रही है। अधिकारी जनता से ढंग से बात नहीं करते और आम आदमी को कोई राहत नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि पहले अधिकारियों में डर होता था कि अगर वे गलत व्यवहार करेंगे तो विधायक या कोई आम व्यक्ति जाकर शिकायत कर देगा। अब ऐसा कुछ नहीं है, क्योंकि जयपुर में किसी के दरवाजे खुले नहीं हैं – मंत्री तक नहीं मिलते।
बीजेपी नेताओं का पलटवार
गहलोत के इन बयानों पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं और अपनी सरकार के बंटवारे की यादें ताजा कर रहे हैं।
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि जिनके कार्यकाल में विधायक होटलों में बंद थे, वे अब स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं।
सुमित गोदारा ने कहा कि कोरोना काल में गहलोत 20 महीने तक मुख्यमंत्री निवास से बाहर नहीं निकले, अब हमारी सक्रिय सरकार पर सवाल उठाना गलत है।
निष्कर्ष
अशोक गहलोत के इन आरोपों से राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर गर्मी आ गई है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और उछल सकता है।
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