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उदयपुर में मंगलवार को ‘वाटर विजन-2047’ सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस दौरान केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि राजस्थान पानी की किल्लत से जूझने वाला राज्य है, लेकिन अब यहां सबसे ज्यादा पानी मिलेगा। हरियाणा और मध्यप्रदेश के साथ हुए समझौतों से राज्य को बड़ा फायदा होगा।
पानी बचाने के लिए नई रणनीति
सम्मेलन की शुरुआत एक निजी रिसॉर्ट में जल कलश भरने की रस्म और स्वागत कार्यक्रम से हुई। केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि –
- नए बांध बनाना अब संभव नहीं क्योंकि नदियां सीमित हैं, और बांध बनाने में काफी समय और पैसा लगता है।
- पाइपलाइन में 30% पानी बर्बाद होता है, इसलिए जरूरी है कि गांव का पानी गांव में ही बचाया जाए।
- जल संरक्षण की व्यवस्था मजबूत करनी होगी ताकि पानी की कमी से बचा जा सके।
जल आत्मनिर्भरता जरूरी – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जल आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि हमें पानी बचाने के उपाय अपनाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो। उन्होंने कहा कि राम जल सेतु लिंक परियोजना राजस्थान के लिए जीवन रेखा साबित होगी। इस परियोजना से –
- 17 जिलों में 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी।
- 3 करोड़ लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
अन्य राज्यों के नेताओं ने भी रखी अपनी बात
इस सम्मेलन में ओडिशा, त्रिपुरा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। इसके अलावा, जल संसाधन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य राज्यों के जल मंत्री भी मौजूद रहे।
निष्कर्ष
राजस्थान के लिए यह समझौते बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं। जल संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों से भविष्य में राज्य को पानी की समस्या से राहत मिलेगी।
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