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राजस्थान: महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की हालत खराब, शिक्षक नहीं, परेशान हैं अभिभावक

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले सहित पूरे प्रदेश में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। पिछले डेढ़ साल से इन स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नहीं हो पाई, जिससे स्कूलों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।

भर्ती रुकी, पढ़ाई ठप

पिछली सरकार ने इन स्कूलों को फ्लैगशिप योजना में शुरू किया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह स्कूल राजनीतिक विवादों में उलझ गए। पिछले साल शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी, लेकिन अब तक परिणाम घोषित नहीं हुआ है और शिक्षक नियुक्त नहीं किए गए हैं।

संसाधनों की भी भारी कमी

इन स्कूलों में न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही प्रशिक्षित शिक्षक। ज़्यादातर अंग्रेजी माध्यम स्कूल हिंदी माध्यम के पुराने भवनों में चल रहे हैं। यहाँ अभी तक बच्चों के लिए खेल, शिक्षण सामग्री या विशेष अंग्रेजी प्रशिक्षण की सुविधा नहीं है।

अभिभावकों की बढ़ी चिंता

कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को निजी स्कूल से निकालकर इन सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में दाखिला दिलाया, लेकिन अब वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षक ही नहीं हैं, इसलिए कुछ अभिभावक फिर से निजी स्कूल में एडमिशन की सोच रहे हैं।

हजार से ज्यादा पद खाली

चित्तौड़गढ़ जिले में 89 महात्मा गांधी स्कूल हैं, जहां करीब 1,000 शिक्षकों के पद खाली हैं। जबकि नए सत्र के लिए लॉटरी के जरिए बच्चों का चयन हो चुका है और 25 जून तक पोर्टल पर लॉकिंग की प्रक्रिया पूरी होनी है।

प्रशासन का जवाब

मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार दशोरा का कहना है कि शिक्षकों की कमी की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है, और जल्द समाधान की उम्मीद है।

निष्कर्ष: अगर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो इन स्कूलों में नामांकन और बच्चों की पढ़ाई दोनों ही प्रभावित होंगे।

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