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भीलवाड़ा: राजस्थान में देश की सबसे महंगी औद्योगिक बिजली मिल रही है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में सरकार बिजली की दरों पर छूट और अनुदान दे रही है। इसके कारण राजस्थान के उद्यमी नए प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पा रहे हैं और अन्य राज्यों में निवेश करने की सोच रहे हैं।
भीलवाड़ा से प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों में शिफ्ट
- भीलवाड़ा से 500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश के नीमच में चले गए हैं।
- उद्यमी गुजरात में निवेश करने की योजना बना रहे हैं।
- सरकार ने सौर ऊर्जा उत्पादन की सीमा 100% से 200% करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ, जिससे उद्यमियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा।
सौर ऊर्जा का सीमित उपयोग
- उद्योगों में 100% क्षमता के सोलर प्लांट लगे होने के बावजूद केवल 20% ऊर्जा का ही उपयोग हो पाता है।
- सौर ऊर्जा सिर्फ 8 घंटे (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) उपलब्ध होती है।
- बाकी 80% बिजली डिस्कॉम से लेनी पड़ती है, जो 7.50 से 8 रुपए प्रति यूनिट मिलती है।
- यदि सोलर एनर्जी इंस्टॉलेशन की सीमा 300-400% कर दी जाए, तो उद्योगों को राहत मिल सकती है।
अन्य राज्यों में क्या फायदे हैं?
✅ गुजरात:
- 5 साल तक 1 रुपए प्रति यूनिट का अनुदान मिल रहा है।
- ओपन एक्सेस पावर पर भी यह छूट लागू है।
✅ महाराष्ट्र:
- पावरलूम, निटिंग, होजरी, गारमेंट इकाइयों के लिए 3.40 से 3.77 रुपए प्रति यूनिट की छूट।
- प्रोसेसिंग और स्पिनिंग इकाइयों के लिए 2 रुपए प्रति यूनिट की छूट।
✅ आंध्रप्रदेश:
- एमएसएमई इकाइयों के लिए 2 रुपए प्रति यूनिट की छूट।
राजस्थान में कोई लाभ नहीं
- राजस्थान में न ही बिजली सस्ती मिल रही है और न ही कोई अनुदान।
- टेक्सटाइल पॉलिसी में बिजली दरों पर छूट का प्रावधान नहीं है।
- अन्य राज्यों के मुकाबले राजस्थान के उद्यमी नुकसान में हैं।
उद्योगों की मांग: सस्ती बिजली और सेट-ऑफ सुविधा
- उद्योगों द्वारा सौर ऊर्जा से अतिरिक्त बिजली उत्पादन करने पर सरकार उसे 3 रुपए प्रति यूनिट में खरीदती है, लेकिन उद्योगों को वही बिजली 8 रुपए प्रति यूनिट में खरीदनी पड़ती है।
- उद्यमियों का कहना है कि सरकार को सेट-ऑफ की सुविधा देनी चाहिए।
- सोलर प्लांट की स्थापना सीमा 300-400% तक बढ़ाई जाए, ताकि उद्योगों को सस्ती बिजली मिल सके।
– पीएम बेसवाल, उद्यमी भीलवाड़ा
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