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बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर में चार दिनों तक चले ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन का गुरुवार को अंत हो गया। राज्य सरकार ने जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। कौशल, रोजगार और उद्यमिता मंत्री केके विश्नोई ने अनशन स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह रोक पूरे राजस्थान में लागू होनी चाहिए।
अनशन स्थल पर हुआ तनाव
मंत्री केके विश्नोई और राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई गुरुवार सुबह 11 बजे बीकानेर बिश्नोई धर्मशाला पहुंचे। चर्चा के दौरान माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया, जब संत सरजूदास ने मंत्री से लिखित आश्वासन मांग लिया। इसके बाद मंत्री ने लिखित आश्वासन देने पर सहमति जताई और आंदोलनकारियों से अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया।
पब्बाराम विश्नोई के बयान पर नाराजगी
फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई के बयान “यदि किसी अनशनकारी की जान गई तो सभी जिम्मेदार होंगे” पर आंदोलनकारी भड़क उठे और उन्हें मंच से बैठने के लिए कहा।
अनशन के दौरान स्वास्थ्य समस्याएं
अनशन 2 फरवरी से पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में शुरू हुआ था। रात को सभी प्रदर्शनकारी बिश्नोई धर्मशाला चले गए। आंदोलन के दौरान कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। चार अनशनकारियों को अस्थायी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और पर्यावरण जीव रक्षा समिति के अध्यक्ष मुखराम धरणीया की हालत गंभीर होने पर उन्हें पीबीएम अस्पताल रेफर किया गया।
समर्थन और भागीदारी
आंदोलन में महिलाओं की बड़ी संख्या शामिल रही और राजस्थान के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी पर्यावरण प्रेमी पहुंचे। अनशन स्थल पर दो लोग बेहोश भी हुए, जिन्हें तुरंत चिकित्सीय सहायता मिली। कुल मिलाकर 21 अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ी।
अंततः सरकार का लिखित आश्वासन और दो संभागों में खेजड़ी कटाई पर रोक मिलने के बाद आंदोलनकारियों ने चार दिन बाद अनशन समाप्त किया।
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