मास्को: रूस ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसे देश में ‘अवांछनीय संगठन’ घोषित कर दिया है। इस निर्णय के तहत संगठन को रूस में किसी भी प्रकार की गतिविधि चलाने की अनुमति नहीं होगी, और इसके साथ सहयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह कदम रूस में 2015 में लागू हुए उस कानून के तहत उठाया गया है, जिसके अंतर्गत उन संगठनों को अवांछनीय माना जाता है जो राज्य की सुरक्षा, संविधान या नागरिक व्यवस्था के लिए खतरा माने जाते हैं। इस कानून के तहत ऐसे संगठनों से किसी भी प्रकार का संपर्क अपराध की श्रेणी में आता है।
यूक्रेन युद्ध के बाद सख्ती तेज
रूसी अभियोजक कार्यालय ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला उस व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें सरकार आलोचकों, मीडिया कर्मियों और कार्यकर्ताओं पर शिकंजा कस रही है। 2022 में यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से ऐसी सख्ती में और तेजी आई है।
क्या है एमनेस्टी इंटरनेशनल?
एमनेस्टी इंटरनेशनल एक वैश्विक गैर-सरकारी संस्था है जो मानवाधिकारों की रक्षा और जागरूकता के लिए काम करती है। इस संस्था की स्थापना 1961 में ब्रिटिश वकील पीटर बेनेन्सन ने की थी, और इसका मुख्यालय लंदन में है। यह संगठन ‘सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा पत्र’ के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करता है।
मुख्य कार्यक्षेत्र और उद्देश्य:
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राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिए अभियान
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यातना और अमानवीय व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना
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मृत्युदंड का विरोध
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा
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महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा
काम करने की प्रक्रिया:
एमनेस्टी इंटरनेशनल दुनिया भर में मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी, रिपोर्टिंग और दस्तावेजीकरण करती है। यह सरकारों और अंतरराष्ट्रीय निकायों पर दबाव बनाकर सुधार की मांग करता है। इसके सदस्य जागरूकता बढ़ाने के लिए पत्र अभियान, ऑनलाइन कैंपेन, और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जैसे तरीकों का उपयोग करते हैं।
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