तारीख: 14 जून 2025 | स्थान: कीव/मॉस्को
रूस और यूक्रेन ने एक बार फिर युद्धबंदियों (POWs) का आदान-प्रदान किया है। इसके साथ ही मॉस्को ने यूक्रेन को अपने 1,200 सैनिकों के शव भी सौंपे हैं। दोनों देशों के बीच यह आदान-प्रदान इस महीने इस्तांबुल में हुई वार्ता में बनी सहमति के तहत हुआ है।
ज़ेलेंस्की ने दी जानकारी
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया,
“हम अपने लोगों को रूसी कैद से वापस लाते रहेंगे। यह इस सप्ताह का चौथा POW एक्सचेंज है।”
उन्होंने इसके साथ कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें रिहा हुए सैनिक कैमरा शाइ, भावुक और कई बार ज़ख्मी हालत में देखे गए। कुछ सैनिकों ने वर्दियों में यूक्रेनी झंडा ओढ़ रखा था, तो कुछ अपने परिजनों से गले मिलते दिखाई दिए।
रूस ने भी पुष्टि की
रूसी रक्षा मंत्रालय ने टेलीग्राम पर जानकारी दी कि उनके सैनिकों का एक और समूह यूक्रेनी नियंत्रण वाले क्षेत्र से वापस लाया गया है। मंत्रालय ने बताया कि ये सैनिक बेलारूस में चिकित्सा जांच के बाद रूस रवाना किए जाएंगे।
रूस की ओर से जारी वीडियो में सैनिक “रूस की जय”, “गौरव हो रूस को” जैसे नारे लगाते हुए नजर आए। उनके हाथों में रूसी झंडे थे और चेहरे पर राहत के भाव।
कितने सैनिक शामिल थे? कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं
हालांकि, रूस ने यह नहीं बताया कि कितने POWs की अदला-बदली हुई है। लेकिन रूसी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रूस को यूक्रेन से किसी भी मृत सैनिक का शव अब तक नहीं मिला है — यह वही दावा है जो रूस ने शुक्रवार को भी दोहराया था।
यूक्रेन को शव वापस मिले
यूक्रेन ने शनिवार को पुष्टि की कि उन्हें 1,200 अपने सैनिकों के शव वापस मिले हैं। यह युद्ध की त्रासदी और मानवीय कीमत को उजागर करता है।
युद्धविराम से अब भी दूर दोनों देश
POW एक्सचेंज के बावजूद, दोनों देशों के बीच वास्तविक संघर्षविराम पर कोई सहमति नहीं बनी है। ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा कि रूस का हमला पूर्वोत्तर सुमी क्षेत्र में तेज हुआ है, लेकिन यूक्रेनी बलों ने एक गांव को फिर से कब्जे में लेकर आक्रमण को रोका है।
ट्रंप की शांति पहल फीकी पड़ी
हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुरुआती शांति वार्ता की कोशिशों से कुछ उम्मीदें जगी थीं, लेकिन अब वे भी झुंझलाहट में यह कह चुके हैं कि
“शायद इन दोनों को थोड़ा और लड़ने दिया जाए… जैसे बच्चे पार्क में लड़ते हैं।”
यह टिप्पणी दर्शाती है कि कूटनीतिक प्रयासों को ठोस सफलता अभी तक नहीं मिली है।
📌 निष्कर्ष: POWs का यह नया आदान-प्रदान कुछ राहत जरूर देता है, लेकिन जमीनी हालात और राजनयिक स्थिति यह दर्शाते हैं कि युद्ध समाप्त होने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
CHANNEL009 Connects India
