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राज्य सरकार वन भूमि पर लंबे समय से बसे लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। सरकार ऐसे लोगों को भूमिधरी (जमीन का मालिकाना) अधिकार देने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाने वाली है। इससे राज्य के हजारों परिवारों को फायदा मिलेगा।
संसदीय कार्य और वन मंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा में बताया कि सरकार वन भूमि, नजूल भूमि और अन्य सरकारी जमीन पर बसे लोगों की समस्याओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बिंदूखत्ता, बापूग्राम और अन्य क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जल्द राहत दी जाएगी।
मंत्री ने बताया कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है, इसलिए सरकार अदालत के निर्देशों के अनुसार ही आगे कदम उठाएगी। टिहरी बांध से विस्थापित लोगों को जो जमीन दी गई थी, उसे पहले गैर आरक्षित वन भूमि घोषित किया गया है और अब उसे राजस्व भूमि बनाया जाएगा। इसके बाद वहां रहने वालों को भूमिधरी अधिकार मिल सकेंगे।
विपक्ष ने भी उठाई मांग
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि कई जगहों पर दशकों से बसे लोगों को अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 से पहले से रह रहे लोगों को भी बेदखली के नोटिस दिए जा रहे हैं, जो उचित नहीं है। उन्होंने चमोली और आसपास के क्षेत्रों के कई परिवारों का उदाहरण भी दिया।
गरीबों के साथ अन्याय का आरोप
विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि नजूल भूमि पर अमीर लोग बड़े-बड़े मॉल बना लेते हैं, लेकिन गरीबों के घर तोड़ दिए जाते हैं। वहीं विधायक विक्रम सिंह नेगी ने कहा कि टिहरी बांध के कारण विस्थापित हुए लोगों को अब तक भूमिधरी अधिकार नहीं मिला है।
विधेयकों पर भी हुई चर्चा
विधानसभा में देवभूमि परिवार रजिस्टर विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग भी उठी। विपक्ष का कहना था कि इससे लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक होने का खतरा है। हालांकि सरकार ने कहा कि जानकारी को सुरक्षित रखने के प्रावधान किए गए हैं और विधेयक को समिति में भेजने की जरूरत नहीं है।
सरकार का कहना है कि भूमिधरी अधिकार से जुड़े प्रस्ताव को जल्द आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे वन भूमि पर बसे हजारों परिवारों को राहत मिल सकेगी।
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