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वीज़ा आवेदकों से सोशल मीडिया खातों की सार्वजनिक पहुंच क्यों चाहता है अमेरिका? जानिए पूरी वजह

वॉशिंगटन:
अमेरिका में अब वीज़ा के लिए आवेदन करने वाले हर व्यक्ति को — भारतीय नागरिकों समेत — अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को सार्वजनिक करना होगा। इस सख्ती का मकसद है राष्ट्र की सुरक्षा और जनहित की रक्षा, विशेष रूप से आव्रजन नियमों पर राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त नीति और कॉलेज परिसरों में बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बीच।


📣 क्या है नया नियम?

23 जून को अमेरिकी दूतावास ने जानकारी दी कि अब से F, M, और J वर्ग के नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा के लिए आवेदन करने वाले सभी व्यक्तियों को पिछले पाँच वर्षों में इस्तेमाल किए गए सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के यूज़रनेम (हैंडल) फॉर्म में भरने होंगे।

इसके बाद 26 जून को DS-160 वीज़ा आवेदनकर्ताओं के लिए भी यही नियम लागू कर दिया गया।


🔍 अमेरिका को क्यों चाहिए सोशल मीडिया की जानकारी?

  • 2019 से ही सोशल मीडिया की स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।

  • अब ट्रंप प्रशासन ने इसे और कठोर बना दिया है, खासकर आव्रजन विरोधी नीति, ICE छापे, और इज़राइल-विरोधी प्रदर्शनों के चलते।

  • अमेरिकी सरकार उन लोगों की पहचान करना चाहती है जिनके सोशल मीडिया पर कट्टर विचार, राजनीतिक असहमति, या विवादास्पद मुद्दों पर बयान दर्ज हैं, जैसे:

    • इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष

    • अमेरिका की आव्रजन नीतियाँ

    • ICE (Immigration and Customs Enforcement) की कार्रवाई


📱 कौन-कौन से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं?

आवेदकों को जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी, उनमें शामिल हैं:

  • Instagram

  • X (पूर्व में Twitter)

  • Facebook

  • YouTube

  • LinkedIn

  • Threads

  • Reddit

  • Tumblr

  • TikTok, WeChat (चीनी प्लेटफॉर्म)

  • Bluesky और निजी ब्लॉग या वेबसाइट्स

इन सभी पर आवेदकों की गतिविधियों की जाँच की जा सकती है, जैसे कि:
पोस्ट, कमेंट, शेयर, लाइक्स, फोटो/वीडियो, टैग, और प्रोफाइल बायो।


🧹 कैसे करें सोशल मीडिया का ‘साफ़-सफाई’?

  • अपनी प्रोफाइल को सार्वजनिक करने से पहले संवेदनशील या विवादास्पद सामग्री हटा दें

  • जरूरत हो तो कुछ पोस्ट डिलीट करें या पुराने कमेंट्स हटा दें।

  • सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट करना एक विकल्प है, लेकिन कई प्लेटफॉर्म्स डाटा हफ्तों तक सेव रखते हैं। इससे पूरी तरह बचाव नहीं होता।

  • सलाह दी जाती है कि वीज़ा मिल जाने और अमेरिका में प्रवेश करने तक सोशल मीडिया प्रोफाइल को सार्वजनिक रखें।


⚖️ क्या यह क़ानूनी रूप से बाध्यकारी है?

  • तकनीकी रूप से अमेरिका किसी को बाध्य नहीं कर सकता कि वे अपने अकाउंट सार्वजनिक करें।

  • लेकिन यदि कोई ऐसा नहीं करता, तो वीज़ा प्रक्रिया में देरी या अस्वीकृति हो सकती है।

  • प्राइवेसी विशेषज्ञों ने इस नीति पर चिंता जताई है।
    इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन (EFF) की वरिष्ठ वकील सोफिया कोप के अनुसार:

“लोगों की निजता का यह हनन है। एक सामान्य छात्र या पर्यटक को इसलिए संदेहास्पद मानना कि उसने अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों को प्राइवेट रखा — यह अनुचित है।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह की जाँच स्वतंत्र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा सकती है और इससे सुरक्षा को भी कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।


🔚 निष्कर्ष

इस नई नीति से अमेरिका में पढ़ाई, काम या घूमने की योजना बना रहे लोगों को अब पहले से ज़्यादा सतर्क रहना होगा। सोशल मीडिया पर की गई कोई भी गतिविधि, अब आपके वीज़ा निर्णय को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, वीज़ा आवेदन से पहले अपनी डिजिटल उपस्थिति का गहन मूल्यांकन करना बेहद जरूरी है।

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