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बरेली जिले में शत्रु संपत्तियों को लेकर कलेक्ट्रेट में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में साफ कहा गया कि अब लंबित मामलों को और नहीं टाला जाएगा। जिले में कुल 220 शत्रु संपत्तियां चिन्हित हैं। इनमें से 177 के वेस्टिंग ऑर्डर मिल चुके हैं और 135 मामलों में अमलदरामद भी हो चुका है। 120 से ज्यादा संपत्तियों की डीवीसी (जिला मूल्यांकन समिति) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बाकी मामलों को 15 दिन में निपटाने का निर्देश दिया गया है।
कई मामलों में प्रक्रिया बाकी
जानकारी के अनुसार, 106 संपत्तियों को डीबीसी में भेजा जाना है और 85 का नामांतरण अभी बाकी है। तहसील सदर में 11 डीवीसी मिल चुकी हैं, जबकि नगर निगम की 45 डीवीसी लंबित हैं। बहेड़ी क्षेत्र में सात वेस्टिंग ऑर्डर अभी प्रक्रिया में हैं।
महेशपुर अटरिया में एक ही गाटा के विभाजन के कारण सात अलग-अलग डीवीसी तैयार की गई थीं। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि इन्हें एकीकृत कर स्पष्ट रिपोर्ट बनाई जाए, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो।
सार्वजनिक उपयोग वाली जमीन का अलग मूल्यांकन
आंवला क्षेत्र में 13 शत्रु संपत्तियों पर नलकूप, पुलिस थाना, स्कूल और मंदिर बने होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सार्वजनिक उपयोग वाले हिस्सों को अलग रखते हुए बाकी जमीन का दोबारा मूल्यांकन किया जाए।
महेशपुर अटरिया के कुछ हिस्सों में कब्रिस्तान भी मौजूद है। ऐसे मामलों में लखनऊ स्थित शत्रु संपत्ति कार्यालय से मार्गदर्शन लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट केस भी नहीं बनेंगे बाधा
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन संपत्तियों पर अदालत में मामला चल रहा है, उनका भी जिला मूल्यांकन समिति से मूल्यांकन कराया जाएगा। आंवला में गलत बंटवारे के मामले में 15 दिन के भीतर सुधार के लिए आवेदन दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
81 संपत्तियों के दस्तावेज भेजे गए
81 शत्रु संपत्तियों के दस्तावेज लखनऊ कार्यालय भेजे जा चुके हैं। वहां से आदेश मिलते ही नामांतरण और डीवीसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि अब शत्रु संपत्तियों के मामलों में तेजी से कार्रवाई की जाएगी और लंबित प्रकरण जल्द निपटाए जाएंगे।
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