इंग्लैंड में भारत के नए टेस्ट कप्तान शुबमन गिल की कप्तानी को लेकर पूर्व महान बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर ने एक बेहद दिलचस्प तुलना की है। गावस्कर ने लिखा कि गिल में वो “शांत आत्म‑विश्वास”, “नियंत्रित आक्रामकता” और “गहराई से सोची गई रणनीति” है, जो 1971 के अजित वाडेकर, 1986 के कपिल देव और 2007 के राहुल द्रविड़—इन तीनों ऐतिहासिक इंग्लैंड विजेता कप्तानों की खासियत रही है
गावस्कर की तुलना
- अजित वाडेकर (1971) – लैकॉनिक, शांत और संयमित
- कपिल देव (1986) – वैश्विक रूप से आक्रामक लेकिन नियंत्रण में
- राहुल द्रविड़ (2007) – गहरा सोच-विचार, इंटेंस और कोम
गिल के बारे में गावस्कर ने कहा:
- दुहराना शतक (269 + 161) की ऐतिहासिक पारी—दूसरे सबसे बड़े मैचaggregat के रिकॉर्ड के साथ
- 607 रन से टेस्ट श्रृंखला में सर्वाधिक रन बनाकर राहुल द्रविड़ (602 रन, 2002) का रिकॉर्ड तोड़ा
- बर्मिंघम में 336 रनों से जीत में चलाया कप्तानी की झलक—बल्लेबाज़ी और रणनीति दोनों में प्रबल नेतृत्व दिखाई गिल ने शुरुआत में कप्तानी की चुनौती को आत्म‑विश्वास से अपनाया, बल्ले और कप्तानी दोनों में खुद की गुणवत्ता दिखाई। गावस्कर का दृष्टिकोण इस स्कोर और शैली को देखकर स्पष्ट है:
- दबदबा: बड़ी पारियाँ (दोहरा शतक + शतक)
- शांत प्रतिबद्धता: कप्तानी के तनाव को नियंत्रित रूप में दर्शाया
- रणनीतिक सूझ: गेंदबाज़ी विकल्पों में सूक्ष्म बदलावों की परख
मार्क बुचर जैसे अंतरराष्ट्रीय पूर्व खिलाड़ियों ने भी कहा कि गिल ‘डंकों की तरह’ सहजता से कप्तानी संभाल रहा है सीरीज स्कोर: भारत फिलहाल 1-2 से पीछे, लेकिन आख़िरी दो टेस्ट में गिल की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
- स्वरूप और आत्म‑विश्वास: क्या गिल अपनी कप्तानी के संकेतों को भविष्य में भी जारी रख पाएंगे?
- नेतृत्व गुण: स्थिरता और सूझबूझ से टीम को पुनः विजयी रस्ते पर ले जाना—यह अब उनकी परीक्षा है।
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