शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 800 अंक लुढ़क गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 769 अंक गिरकर 81,537 पर बंद हुआ। बाजार में गिरावट से निवेशकों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया।
गिरावट की बड़ी वजहें क्या रहीं?
1️⃣ वैश्विक अनिश्चितता
दुनिया भर में चल रही राजनीतिक और भू-राजनीतिक तनाव की स्थितियों ने बाजार को कमजोर किया। अमेरिका और यूरोप से जुड़े कुछ घटनाक्रमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बना, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। विदेशी बाजारों में कमजोरी आते ही यहां भी बिकवाली बढ़ गई।
2️⃣ रुपये की कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर करीब 91.99 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इससे आयात महंगा होने की चिंता बढ़ी और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बनी। इसका नकारात्मक असर शेयर बाजार पर साफ दिखा।
3️⃣ विदेशी निवेशकों की बिकवाली
जनवरी महीने में विदेशी निवेशकों ने लगातार शेयर बेचे। विदेशी पूंजी के बाहर जाने से बाजार पर दबाव बढ़ा और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों में तेज गिरावट आई।
4️⃣ बजट से पहले सतर्कता
केंद्रीय बजट से पहले निवेशक आमतौर पर सावधानी बरतते हैं। इस बार भी बजट को लेकर कई तरह की आशंकाएं रहीं। खर्च बढ़ाने की सीमित गुंजाइश की चिंता के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार और फिसल गया।
कुल मिलाकर क्या संदेश?
वैश्विक हालात, कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बजट से पहले सतर्कता—इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को नीचे खींचा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेत साफ नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।