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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बोला- फैसला सरकार को ही लेना है तो कमेटी में नेता विपक्ष को रखने का दिखावा क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है, तो चयन समिति में नेता विपक्ष को शामिल करने का क्या मतलब रह जाता है।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या यह सिर्फ “दिखावा” बनकर रह गया है। न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी चिंता जताई।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में सरकार का प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है, जिससे स्वतंत्र संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया संविधान और कानून के तहत की जा रही है और इसमें सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन होता है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं।
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