गाजा में जारी संघर्ष अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। यमन स्थित हूती विद्रोहियों ने इजराइल के सबसे बड़े हवाई अड्डे — बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट — को निशाना बनाकर दुनिया का ध्यान खींचा है। बताया जा रहा है कि इस हमले में उन्होंने एक हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया, जो आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज थी। इसके बाद इजराइली सेना ने यमन के होदेइदाह क्षेत्र में जवाबी हमले किए।
हवाई घेराबंदी का एलान
इस हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने इजराइल के खिलाफ हवाई घेराबंदी लागू करने की घोषणा कर दी है। उनका दावा है कि वे अब इजराइल पर आने-जाने वाले विमानों को रोकने में सक्षम हैं और उनके पास ऐसी तकनीक है जो दुश्मन की किसी भी सुरक्षा व्यवस्था को चकमा दे सकती है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई एयरलाइन उनकी हिदायतों को नजरअंदाज करती है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी वे नहीं लेंगे।
‘फिलिस्तीन-2’ मिसाइल: इजराइल के लिए नई चुनौती
इस हमले में जिस मिसाइल का प्रयोग किया गया, उसे हूतियों ने ‘फिलिस्तीन-2’ नाम दिया है। यह मिसाइल ईरान की ‘फतेह-110’ प्रणाली पर आधारित बताई जाती है, जिसकी मारक क्षमता करीब 1300 मील है। इजराइली सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह मिसाइल इजराइल की रक्षा प्रणाली को भेदते हुए अपने लक्ष्य पर सटीकता से जा पहुंची।
इजराइल और अमेरिका का पलटवार
हमले के तुरंत बाद इजराइली वायुसेना ने यमन के कई इलाकों, खासकर होदेइदाह बंदरगाह, पर बमबारी की। इसका उद्देश्य हूती नियंत्रण वाले इलाकों की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमज़ोर करना था। उधर, अमेरिका ने भी इस मोर्चे पर चुप्पी नहीं साधी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च से अब तक अमेरिकी सेना यमन में हूती ठिकानों पर 800 से अधिक हमले कर चुकी है। हालांकि हूती दावा करते हैं कि उनके पास भूमिगत सुरंगों और भंडारण केंद्रों का ऐसा नेटवर्क है जो उन्हें इन हमलों से बचा लेता है।
ईरान पर आरोप और जवाबी बयान
इजराइल और अमेरिका यह मानते हैं कि हूती विद्रोही ईरान द्वारा प्रायोजित हैं और उन्हें हथियार, ड्रोन और मिसाइल तकनीक वहीं से मिलती है। लेकिन ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर इन आरोपों का खंडन किया है। उसका कहना है कि यमन की जनता अपने तरीके से संघर्ष कर रही है और यह उनकी स्वतंत्र नीति का हिस्सा है।
ईरान ने हाल ही में ‘क़ासिम बसीर’ नाम की एक नई मिसाइल भी प्रदर्शित की है, और चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह भी पलटवार करेगा।
क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर
इस घटनाक्रम से गाजा में इजराइल की आक्रामक कार्रवाई और तेज हो सकती है। वहीं हूती संगठन स्पष्ट कर चुका है कि जब तक इजराइल गाज़ा, सीरिया और लेबनान में सैन्य गतिविधियाँ नहीं रोकता, वे भी अपने हमले जारी रखेंगे। इस टकराव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु बातचीत भी ठप हो चुकी है।
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