वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर दो महीने से चल रही सैन्य कार्रवाई को रोकने की घोषणा की है। इस कदम से इज़रायल समेत अमेरिका के कई सहयोगी देशों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
ट्रंप का बड़ा ऐलान
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ एक संयुक्त प्रेस बैठक में ट्रंप ने कहा, “हूती गुट ने संकेत दिए हैं कि वे अब संघर्ष नहीं चाहते और उन्होंने रणनीतिक समुद्री मार्गों पर हमले बंद करने का भरोसा दिलाया है। ऐसे में हम फिलहाल के लिए अपनी सैन्य कार्रवाई स्थगित कर रहे हैं।”
इस फैसले के बाद अमेरिका अब यमन में हूती ठिकानों पर हमले नहीं करेगा।
इज़रायल को मिली “नो वार्निंग”
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने हूतियों के साथ बातचीत की जानकारी इज़रायल को पहले से नहीं दी थी। यही वजह है कि ट्रंप की इस घोषणा ने इज़रायली नेतृत्व को चौंका दिया है। इज़रायल को लगता है कि इस बातचीत से उसे जानबूझकर बाहर रखा गया।
इज़रायल की सैन्य प्रतिक्रिया
उधर इज़रायल ने हूतियों पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़रायली वायुसेना ने सना स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर उसे पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया है। यह जवाबी हमला उस मिसाइल हमले के बाद किया गया, जिसमें हूतियों ने इज़रायली हवाई अड्डे को टारगेट किया था।
राजनयिक समीकरणों में बदलाव
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, खासतौर पर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका के इस रुख से इज़रायल और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा हो सकता है, जबकि हूती विद्रोहियों को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है।
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