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हुब्बल्ली।
संत शिरोमणि पीपा महाराज की 702वीं जयंती 12 अप्रैल को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। श्री पीपा क्षत्रीय (दर्जी) समाज, उत्तर कर्नाटक हुब्बल्ली के द्वारा इस मौके पर कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में ललितकुमार और महेन्द्र कुमार दैय्या परिवार (धुंधाड़ा) प्रमुख सहयोगी होंगे।
11 अप्रैल को सत्संग, 12 अप्रैल को कथा और महाप्रसाद
महोत्सव से एक दिन पहले, 11 अप्रैल को शाम 6 बजे श्री पीपा क्षत्रीय समाज भवन, हुब्बल्ली में सत्संग होगा।
12 अप्रैल को सुबह 7 बजे सीबीटी किला हनुमान मंदिर के पास श्री पीपा क्षत्रीय समाज भवन में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12:15 बजे हुब्बल्ली के वालवेकर गली स्थित अग्रसेन भवन में महाप्रसादी का आयोजन होगा।
महोत्सव की तैयारियों में समाज के सभी पदाधिकारी और सदस्य जुटे हुए हैं।
धर्म और संस्कृति के प्रचारक थे संत पीपा महाराज
भारत की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने में संतों और महापुरुषों का बड़ा योगदान रहा है। उन्हीं में से एक थे संत पीपा महाराज, जो मध्यकाल में गढ़ गागरौन के शासक राव प्रताप सिंह थे। उन्होंने राजा के पद को त्यागकर आध्यात्मिक जीवन अपनाया और संत पीपाजी के नाम से प्रसिद्ध हुए।
वे संत रामानंद के बारह प्रमुख शिष्यों में से एक थे, जिनमें कबीर, धन्ना और रैदास जैसे संत भी शामिल हैं। संत पीपा ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और हिंसा का विरोध किया और स्वावलंबन व आंतरिक स्वतंत्रता का संदेश दिया।
उन्होंने राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में भ्रमण कर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागृति फैलाने का काम किया। संत पीपा की वाणियां आज भी लोकगायन का हिस्सा हैं और उनकी शिक्षाओं को गुरु ग्रंथ साहिब में भी स्थान मिला है, जो उनके महान योगदान का प्रमाण है।
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