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140 साल पुराने टोरडी सागर बांध की नहरें होंगी मजबूत, 100 करोड़ से 64 गांवों को मिलेगा सालभर पानी

टोडारायसिंह। साल 1887 में बने ऐतिहासिक टोरडी सागर बांध के नहरी तंत्र को अब करीब 140 साल बाद मजबूत और आधुनिक बनाया जाएगा। राज्य सरकार ने हाल ही के बजट में इसके लिए 100 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।

इस योजना के तहत बांध को मजबूत किया जाएगा और उससे जुड़ी साउथ, नॉर्थ और मिडिल कैनाल को पक्का किया जाएगा। यह काम ईआरसीपी (ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट) लागू होने से पहले किया जाएगा, ताकि अतिरिक्त पानी को सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके।

175 किलोमीटर में फैला है नहर नेटवर्क

टोरडी सागर बांध की भराव क्षमता 30 फीट है। इसके साथ तीन प्रमुख नहरें बनाई गई थीं — साउथ कैनाल, नॉर्थ कैनाल और मिडिल कैनाल। करीब 175 किलोमीटर तक फैली इन नहरों से मालपुरा, टोडारायसिंह, पीपलू और टोंक तहसील के 64 गांवों की हजारों हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है।

ओवरफ्लो से हुआ भारी नुकसान

पिछले कुछ वर्षों में बांध के बार-बार भरने और ओवरफ्लो होने से नहर तंत्र को काफी नुकसान हुआ। तेज बहाव के कारण करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में कच्ची और पक्की नहरें टूट गईं। कई स्थानों पर साइफन और पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गए। बजट की कमी के कारण समय पर मरम्मत नहीं हो पाई, जिससे किसानों तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया।

ईआरसीपी से जुड़ेगा प्रोजेक्ट

ईआरसीपी योजना के तहत बीसलपुर बांध का अतिरिक्त पानी टोरडी सागर सहित अन्य जलाशयों में लाया जाएगा। ऐसे में पहले से नहरों को मजबूत करना जरूरी है। बजट में मालपुरा क्षेत्र के प्राचीन बम्ब तालाब, मोर और भासू के सार्वजनिक तालाबों के सुदृढ़ीकरण के लिए भी 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

पहले भी बने थे संकट के हालात

1996 में अधिक ओवरफ्लो के कारण रेलवे लाइन और टोडा-मालपुरा सड़क को नुकसान पहुंचा था। 2024-25 में भी बांध में ज्यादा पानी भरने से सड़क करीब डेढ़ महीने तक बंद रही।

पिछले वर्षों में बांध का जलभराव कई बार 30 फीट से अधिक रहा और दो महीने तक लगातार ओवरफ्लो की स्थिति बनी रही।

क्या-क्या होंगे सुधार कार्य

योजना के तहत बांध की सुरक्षा दीवार, पिचिंग सेफ्टी वॉल, ओवरफ्लो के लिए सेफ्टी चैनल और मुख्य नहरों के सुधार का काम किया जाएगा। साथ ही कमांड क्षेत्र की छोटी नहरों (माइनरों) को भी पक्का किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि बजट की मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इस योजना से क्षेत्र में स्थायी सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होने की उम्मीद है।

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