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5 हजार साल पुरानी सभ्यता कालीबंगा, लेकिन पर्यटन में पिछड़ा

हनुमानगढ़ जिले का कालीबंगा गांव भारत की प्राचीन हड़प्पा सभ्यता का एक अहम हिस्सा है। यहां करीब 5000 साल पुरानी नगर सभ्यता के अवशेष आज भी मौजूद हैं, जो इसे इतिहास में खास बनाते हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इतनी ऐतिहासिक जगह होने के बावजूद इसे पर्यटन के नक्शे पर वह पहचान नहीं मिल पाई, जिसकी यह हकदार है।


हड़प्पा काल के अमूल्य अवशेष

  • कालीबंगा क्षेत्र में 1500 से अधिक हड़प्पाकालीन वस्तुएं खुदाई में मिली हैं।

  • ये सभी वस्तुएं कालीबंगा संग्रहालय में संरक्षित हैं।

  • यहां मिट्टी के बर्तन, खिलौने, तांबे के औजार, खेल के पासे, जल निकासी की पाइप, और अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाले बर्तन रखे गए हैं।


सभ्यता का अद्भुत उदाहरण

  • कालीबंगा के लोग पांच हजार साल पहले खेती और नियोजित व्यापार करते थे।

  • यहां का ड्रेनेज सिस्टम इतना बेहतर था कि बारिश का पानी भी जमा नहीं होता था।

  • इस क्षेत्र की ईंट बनाने की तकनीक आज भी शोध का विषय है।

  • सात फुट लंबे इंसानों के कंकाल भी यहां मिले हैं, जो उस दौर की शारीरिक बनावट को दर्शाते हैं।


पर्यटकों की कमी का कारण

  • सीधी बस या ट्रेन सुविधा नहीं होने से पर्यटक यहां आसानी से नहीं पहुंच पाते।

  • ठहरने की सुविधा भी नहीं है — न रेस्ट हाउस है, न धर्मशाला।

  • इस कारण इतनी ऐतिहासिक जगह होते हुए भी यहां पर्यटकों की संख्या बेहद कम है।


पर्यटन हब बनाने की जरूरत

  • कालीबंगा के साथ-साथ हनुमानगढ़ जिले में भटनेर किला, गोगामेड़ी मंदिर जैसे कई ऐतिहासिक स्थल हैं।

  • सरकार को इन सभी को जोड़कर एक टूरिज्म हब बनाना चाहिए, जिससे रोजगार भी बढ़ेगा और पहचान भी।


योजनाएं जल्द तैयार होंगी

जिला परिषद सीईओ ओपी बिश्नोई ने कहा है:

  • कालीबंगा क्षेत्र के विकास के लिए पंचायती राज विभाग से योजनाएं तैयार करवाई जाएंगी।

  • परिवहन की सुविधा बढ़ाने के लिए डीटीओ से चर्चा की जाएगी ताकि स्थानीय लोगों के लिए सीधी बस सेवा शुरू हो सके।


संग्रहालय की जानकारी

  • संग्रहालय शुक्रवार छोड़कर सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है।

  • प्रवेश शुल्क: भारतीयों और विदेशी पर्यटकों के लिए 5 रुपये

  • 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए निशुल्क प्रवेश

  • जगह-जगह जानकारी वाले बोर्ड भी लगाए गए हैं।


निष्कर्ष:

कालीबंगा भारत की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। अगर सरकार ठोस कदम उठाए, तो यह स्थान विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास पहचान बना सकता है। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

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