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शहडोल परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का खेल जारी
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। यहां बिना ट्रायल और परीक्षा दिए 2500 से 3000 रुपये में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया जा सकता है।
कैसे बन रहा लाइसेंस?
शहडोल परिवहन विभाग में एजेंटों और दलालों के माध्यम से बिना किसी प्रक्रिया के लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं।
- लाइसेंस के लिए वाहन चलाने की जरूरत नहीं
- कोई ट्रायल या परीक्षा नहीं देनी पड़ती
- सिर्फ आधार कार्ड देना होता है
- पहले लर्निंग लाइसेंस और फिर एक महीने बाद स्थायी लाइसेंस मिल जाता है
ट्रायल और परीक्षा की जरूरत नहीं
नियमों के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ट्रायल और परीक्षा जरूरी होती है।
- पहले लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन और परीक्षा होती है
- एक महीने बाद ट्रायल ट्रैक पर वाहन चलाकर परीक्षा पास करनी होती है
- लेकिन शहडोल में पैसे देने पर बिना किसी प्रक्रिया के लाइसेंस मिल रहा है
कार्यालय में कर्मचारियों की मनमानी
शहडोल परिवहन विभाग में अधिकारी कम ही कार्यालय आते हैं, जिससे सारा काम कर्मचारी ही संभालते हैं।
- कर्मचारियों की एजेंटों से मिलीभगत
- डिजिटल होने के बावजूद बिचौलियों के बिना काम नहीं होता
- लोगों से दोगुनी रकम वसूली जा रही है
लाइसेंस बनवाने के लिए वसूली जा रही ज्यादा रकम
शहडोल परिवहन विभाग में लाइसेंस बनवाने के लिए तय शुल्क से दोगुने पैसे वसूले जा रहे हैं।
| प्रक्रिया | सरकारी शुल्क (रुपये में) | बिचौलियों द्वारा वसूली गई राशि (रुपये में) |
|---|---|---|
| लर्निंग लाइसेंस | 425 | 1000-1500 |
| स्थायी लाइसेंस | 1075 | 1500-2000 |
| लाइसेंस रिनुअल | 476 | 1000-1500 |
क्या होना चाहिए?
शहडोल परिवहन विभाग में इस भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- ट्रायल और परीक्षा के बिना लाइसेंस जारी करने पर रोक लगे
- डिजिटल सिस्टम को पारदर्शी बनाया जाए
- अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए
ड्राइविंग लाइसेंस बिना ट्रायल के बनना सड़क सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे भ्रष्टाचार को रोकना जरूरी है।
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