Related Articles
छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को अतिशेष धान की नीलामी को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए काम रोको प्रस्ताव लाने की मांग की। विपक्ष का कहना था कि धान की नीलामी से राज्य को 8 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इस पर मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब देते हुए बताया कि पहले भी धान की नीलामी की गई है।
विधानसभा में नारेबाजी और विपक्ष का विरोध
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे नाराज होकर विपक्षी विधायक गर्भगृह में प्रवेश कर गए, जिससे वे स्वतः निलंबित हो गए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने यह मुद्दा उठाया। उनके साथ विधायक उमेश पटेल, संगीत सिन्हा और भूपेश बघेल ने भी सरकार से जवाब मांगा।
महतारी वंदन योजना पर भी उठा सवाल
सदन में महतारी वंदन योजना का मुद्दा भी उठा। विपक्ष ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को घेरते हुए सवाल किया कि 3971 महिलाओं को योजना का लाभ क्यों नहीं मिला।
विधायक विक्रम मंडावी ने पूछा कि कितनी महिलाओं को अब तक योजना की एक भी किस्त नहीं मिली। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि 3971 महिलाओं को अब तक कोई राशि नहीं मिली क्योंकि:
- आधार कार्ड सीडिंग न होना
- आधार नंबर असक्रिय होना
- बैंक खाते पर रोक
- खाताधारक की मृत्यु
विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि एक साल में भी इन महिलाओं की राशि जारी नहीं की गई। इस पर मंत्री राजवाड़े ने पूर्व सरकार को दोष देने की बात कही, जिससे कांग्रेस की महिला विधायक नाराज होकर विरोध करने लगीं।
धान नीलामी पर विपक्ष का विरोध
विपक्ष के अनुसार, धान की लागत 3100 रुपये प्रति क्विंटल है, जिसमें 500 रुपये के अन्य खर्चे जोड़ने पर 3600 रुपये प्रति क्विंटल लागत होती है। लेकिन नीलामी में 1600 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे, जिससे 2000 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान होगा।
40 लाख मीट्रिक टन धान की नीलामी से राज्य को 8000 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होगी।
विपक्ष ने तर्क दिया कि पंजाब में 179 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ, जिसे केंद्र सरकार ने खरीदा है, लेकिन छत्तीसगढ़ में 40 लाख मीट्रिक टन धान की नीलामी करनी पड़ रही है।
सरकार का जवाब
मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि:
- केंद्र सरकार ने 70 लाख टन चावल उपार्जन की अनुमति दी है।
- 54 लाख टन चावल भारतीय खाद्य विभाग को जाएगा, 16 लाख टन नान को मिलेगा।
- अतिरिक्त 13.34 लाख टन चावल को रखा जाएगा।
- 40 लाख टन अतिशेष धान की नीलामी की जाएगी, जैसा 2020-21 में भी किया गया था।
- किसानों को उनकी पूरी राशि दी जा रही है, जिससे कोई नाराजगी नहीं है।
सरकारी जवाब को लेकर खुद मंत्री पर उठे सवाल
विधायक अजय चंद्राकर ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से सवाल किया कि एक ही सवाल के दो अलग-अलग जवाब क्यों दिए गए। उन्होंने कहा कि अफसरों ने गलत जानकारी दी है, जिससे सदन को भ्रमित किया जा रहा है।
विपक्ष ने मांग की कि धान की नीलामी के बजाय केंद्र सरकार से चावल का कोटा बढ़ाने की अपील की जाए। लेकिन सरकार ने साफ किया कि नीलामी से किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा।
निष्कर्ष
विधानसभा में धान की नीलामी और महतारी वंदन योजना को लेकर बड़ा हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार पर 8000 करोड़ के नुकसान और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। वहीं, सरकार ने जवाब दिया कि धान की नीलामी पहले भी हुई है और किसानों को पूरा भुगतान मिल रहा है।
CHANNEL009 Connects India
