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बाड़मेर: जोधपुर के पूर्व सांसद गजसिंह गुरुवार को तिलवाड़ा मेले में पहुंचे। उन्होंने मेले में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए और पशुपालकों को प्रोत्साहित किया। इसके अलावा, उन्होंने मेले का अवलोकन भी किया। राजस्थान पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने मेले की महत्वपूर्ण परंपराओं और ओरण गोचर भूमि के मुद्दे पर अपनी राय दी।
तिलवाड़ा मेले पर गजसिंह की राय
गजसिंह ने कहा कि तिलवाड़ा मेला बहुत ही अच्छी तरह से व्यवस्थित है। यहां घोड़ों की संख्या काफी अच्छी है और व्यवस्थाएं भी ठीक हैं। यह मेला 700 साल पुरानी संस्कृति से जुड़ा हुआ है और इसे संजोकर रखना बहुत बड़ी बात है।
सरकार को क्या प्रयास करने चाहिए?
उन्होंने कहा कि सरकार को मेले की सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। खासकर, मेले में गंदा और रासायनिक पानी आने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा, मेले का प्रचार-प्रसार बढ़ाने की भी जरूरत है।
ओरण गोचर भूमि पर गजसिंह का बयान
गजसिंह ने ओरण गोचर भूमि के मुद्दे को बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हाल ही में इस पर एक फैसला आया है और सरकार को इसे राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करना चाहिए। साथ ही, सोलर और विंड एनर्जी कंपनियों को जमीन देने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि खेती और जरूरतों के लिए पर्याप्त जमीन बची रहे। इसके अलावा, पर्यावरण और अन्य मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए।
मालाणी महोत्सव की जरूरत
गजसिंह ने कहा कि बालोतरा में मालाणी महोत्सव का आयोजन जरूर होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसकी शुरुआत तिलवाड़ा से की जानी चाहिए।
संतों के मेले की परंपरा फिर से शुरू होनी चाहिए
तिलवाड़ा में पहले संतों का मेला आयोजित किया जाता था। इस परंपरा को फिर से शुरू करने पर रावल किशनसिंह ने कहा कि 14वीं शताब्दी में मल्लीनाथजी के समय यह मेला लगता था, जहां संत भजन-भाव किया करते थे। अब फिर से संतों को बुलाकर इस परंपरा को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
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