भीलवाड़ा: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भोपाल ने कोटड़ी के धर्म तालाब और बड़ा तालाब की 27 बीघा जमीन पर भूखंड काटने के मामले में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, जिला कलेक्टर भीलवाड़ा, प्रदूषण नियंत्रण मंडल बोर्ड सचिव, एसडीएम कोटड़ी, तहसीलदार, पूर्व सरपंच जमनालाल डीडवानिया और वर्तमान सरपंच कांता डीडवानिया को नोटिस जारी किया है।
क्या है मामला?
कोटड़ी के धर्म तालाब और बड़ा तालाब कुल 104 बीघा में फैले हुए हैं। लेकिन ग्राम पंचायत ने 27 बीघा जमीन पर भूखंड काट दिए, जिससे तालाब का आकार छोटा हो गया।
शिकायत और जनहित याचिका
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कोटड़ी के विष्णु कुमार वैष्णव ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इसके बाद अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा के जरिए एनजीटी में जनहित याचिका दायर की गई।
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एनजीटी ने इस पर सुनवाई करते हुए सात लोगों को नोटिस जारी किया और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RPCB) से 6 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
तालाब का मूल स्वरूप नष्ट हो रहा है
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अतिक्रमण और भूखंड काटने से तालाब का क्षेत्रफल कम हो गया है।
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सीवरेज का गंदा पानी, शहर का कचरा और मलबा डालकर तालाब को खराब किया जा रहा है।
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यह तालाब पेयजल और कृषि के लिए मुख्य स्रोत हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा जरूरी है।
आगे की कार्रवाई
एनजीटी ने जिला कलेक्टर को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
भीलवाड़ा: तालाब की जमीन पर भूखंड काटने का मामला, एनजीटी ने मुख्य सचिव समेत 7 को नोटिस भेजा
भीलवाड़ा: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भोपाल ने कोटड़ी के धर्म तालाब और बड़ा तालाब की 27 बीघा जमीन पर भूखंड काटने के मामले में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, जिला कलेक्टर भीलवाड़ा, प्रदूषण नियंत्रण मंडल बोर्ड सचिव, एसडीएम कोटड़ी, तहसीलदार, पूर्व सरपंच जमनालाल डीडवानिया और वर्तमान सरपंच कांता डीडवानिया को नोटिस जारी किया है।
क्या है मामला?
कोटड़ी के धर्म तालाब और बड़ा तालाब कुल 104 बीघा में फैले हुए हैं। लेकिन ग्राम पंचायत ने 27 बीघा जमीन पर भूखंड काट दिए, जिससे तालाब का आकार छोटा हो गया।
शिकायत और जनहित याचिका
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कोटड़ी के विष्णु कुमार वैष्णव ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इसके बाद अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा के जरिए एनजीटी में जनहित याचिका दायर की गई।
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एनजीटी ने इस पर सुनवाई करते हुए सात लोगों को नोटिस जारी किया और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RPCB) से 6 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
तालाब का मूल स्वरूप नष्ट हो रहा है
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अतिक्रमण और भूखंड काटने से तालाब का क्षेत्रफल कम हो गया है।
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सीवरेज का गंदा पानी, शहर का कचरा और मलबा डालकर तालाब को खराब किया जा रहा है।
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यह तालाब पेयजल और कृषि के लिए मुख्य स्रोत हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा जरूरी है।
आगे की कार्रवाई
एनजीटी ने जिला कलेक्टर को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
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