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नरवाई जलाने से मिट्टी को नुकसान
गेहूं की फसल कटाई के बाद खेत में जो सूखी डंठल (नरवाई) बचती है, उसे जलाना मिट्टी के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है और फसल उत्पादन घटने लगता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा 1.66 प्रतिशत से ज्यादा होनी चाहिए। हालांकि मिट्टी की विद्युत चालकता और पीएच वैल्यू सामान्य मिली है और एनपीके की मात्रा भी ठीक बताई गई है।
नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान
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नरवाई जलाने से खेत में मौजूद छोटे-छोटे सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन बंजर होने लगती है।
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जमीन की जैव विविधता खत्म हो जाती है।
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आग के कारण मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं।
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भूमि कठोर हो जाती है, जिससे उसकी पानी रोकने की क्षमता घट जाती है और फसलें जल्दी सूखने लगती हैं।
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खेत के किनारे लगे पेड़-पौधे और फलदार वृक्ष जलकर नष्ट हो सकते हैं।
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पर्यावरण प्रदूषित होता है और वातावरण का तापमान बढ़ता है, जिससे जमीन और भी गर्म हो जाती है।
नरवाई से खाद बनाएं
नरवाई जलाने से मिट्टी में कार्बन, नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा भी घट जाती है। इसके अलावा, मिट्टी में रहने वाले केंचुए भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेत की उर्वरता और भी कम हो जाती है। इसलिए किसान नरवाई को जलाने की बजाय उसे रोटावेटर या प्लाऊ से मिट्टी में मिला दें। इससे जैविक खाद बनेगी, जो फसल के लिए फायदेमंद होगी और उत्पादन भी बढ़ेगा।
नरवाई से खाद बनाने का आसान तरीका
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150 ग्राम गुड़ लें और उसे 5 लीटर पानी में मिलाकर अच्छी तरह उबालें।
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उबालने के बाद ऊपर आई गंदगी को हटा दें और मिश्रण को ठंडा होने के लिए रख दें।
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जब मिश्रण हल्का गुनगुना हो जाए, तब उसमें 50 ग्राम बेसन मिलाएं।
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फिर उसमें 4 कैप्सूल खोलकर डालें और लकड़ी से अच्छे से मिलाएं।
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इस मिश्रण को किसी खुले टब या ट्रे में रखें और ऊपर से हल्का कपड़ा ढंक दें।
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1 टन कृषि अवशेष के कंपोस्ट के लिए 5 लीटर मिश्रण, 1 एकड़ धान के खेत के लिए 10 लीटर और गेहूं, मूंग जैसी फसलों के लिए 5 लीटर मिश्रण का उपयोग करें।
विशेषज्ञ की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव के वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार का कहना है कि किसानों को नरवाई जलाने से बचना चाहिए। कटाई के बाद बचे अवशेषों को खेत में कल्टीवेटर, हेरो या प्लाऊ की मदद से मिट्टी में मिलाना चाहिए। इससे खेत में खुद-ब-खुद प्राकृतिक खाद तैयार हो जाएगी और मिट्टी की सेहत सुधरेगी।
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