जयपुर। राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर-शिक्षकों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो हफ्ते में योजना (रोडमैप) मांगी है कि ये पद कब और कैसे भरे जाएंगे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर किसी कारण से भर्ती पर रोक है तो उसकी जानकारी दी जाए, ताकि रास्ता साफ किया जा सके। अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश एम. एम. श्रीवास्तव और न्यायाधीश आनंद शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर दिया, जो करीब 13 साल से लंबित है।
क्या है मामला?
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और डॉक्टर-शिक्षकों के करीब 40% पद खाली हैं। ये कॉलेज सरकार द्वारा सीधे या सोसाइटी के ज़रिए चलाए जा रहे हैं।
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राज्य सरकार के 6 मेडिकल कॉलेजों में 2400 से ज्यादा पद हैं, जिनमें से 950 से ज्यादा पद खाली हैं।
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ईएसआई मेडिकल कॉलेज, अलवर में 94 पदों में से 72 पद खाली हैं।
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राजमेस के तहत चल रहे 22 कॉलेजों में 2700 से ज्यादा पदों में से 1063 खाली हैं।
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निजी कॉलेजों की बात करें तो वहां जरूरी 1963 पदों के बदले 2600 शिक्षक काम कर रहे हैं, यानी वहां कोई कमी नहीं है।
याचिकाकर्ता के वकील तनवीर अहमद ने कहा कि जिन डॉक्टरों को यहां पढ़ाया जा रहा है, वे आगे चलकर इंसानों का इलाज करेंगे। ऐसे में अगर उन्हें सही शिक्षण नहीं मिला, तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है।
कोर्ट की टिप्पणी:
कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में पद खाली रहने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हर सीट के अनुसार शिक्षकों की संख्या तय होती है। अगर पद नहीं भरे गए, तो डॉक्टरों की पढ़ाई सही तरीके से नहीं हो सकेगी।
अब सभी की नजर सरकार की ओर से आने वाली उस कार्ययोजना पर है, जिसमें यह बताया जाएगा कि यह भारी कमी कब और कैसे दूर की जाएगी।
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