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गौवंश ले जाते व्यापारियों को परेशान कर रही समन्वय की कमी, 318 बैल अब भी अटके

मेड़ता सिटी: बलदेवराम पशु मेले से खरीदे गए नागौरी बैलों को मध्यप्रदेश ले जा रहे पशुपालकों और व्यापारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। गृह विभाग द्वारा 20 दिन पहले भेजे गए पत्र में मध्यप्रदेश का नाम न होने से स्थिति और उलझ गई है। पत्र में उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र का नाम था, लेकिन मध्यप्रदेश का जिक्र नहीं था, जिससे राजस्थान-मध्यप्रदेश बॉर्डर पर पशु अटक गए हैं।

गौरक्षकों की वजह से परेशान व्यापारी

कुछ तथाकथित गौरक्षकों ने पशुपालकों को परेशान किया, उनके साथ मारपीट की और उनके फोन व नकदी छीन ली। एक ड्राइवर ने बताया कि 150 किलोमीटर तक पीछा कर मारपीट की गई, जिससे वह घायल अवस्था में मेड़ता लौटा। मेले के प्रभारी ने उसकी घर वापसी में मदद की

प्रशासन की ओर से प्रयास जारी

मेड़ता में अब भी 318 बैल और करीब 50 व्यापारी फंसे हुए हैं, जो मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। इन बैलों के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। जो बैल नहीं बिके, वे भी वापस ले जाए जा रहे हैं।

मेले में खरीदे गए नागौरी बैल मध्यप्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में खेती के काम आते हैं, खासतौर पर जहां ट्रैक्टर नहीं चल पाते। भील समुदाय के लोग इन बैलों से खेती करते हैं।

मध्यप्रदेश प्रशासन की जांच, जल्द हल की उम्मीद

एमपी प्रशासन द्वारा बैलों के कागजातों की जांच की जा रही है और नागौर प्रशासन द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज मुहैया करवाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि 1-2 दिन में बैलों को जाने की अनुमति मिल जाएगी

इस घटना से साफ है कि राज्य स्तरीय समन्वय की कमी, प्रशासनिक चूक और कुछ असामाजिक तत्वों की वजह से पशुपालकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

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