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जयपुर में संपत्ति के लिए साजिश: प्रोफेसर पत्नी को जबरन भेजा नशा मुक्ति केंद्र, कोर्ट से बाप-बेटे को झटका

जयपुर के वैशाली नगर इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड बीएसएनएल अधिकारी ने अपने बेटे के साथ मिलकर करोड़ों की संपत्ति हथियाने के लिए अपनी तलाकशुदा पत्नी, जो एक महिला प्रोफेसर हैं, को मानसिक रोगी बताकर जबरन नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवा दिया।

15 घंटे बाद मिली आज़ादी
महाराष्ट्र के एमआईटी संस्थान में प्रोफेसर रही डॉ. रीना ने अपने दोस्तों और मायके वालों को जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस की मदद से उन्हें 15 घंटे बाद नशा मुक्ति केंद्र से बाहर निकाला गया।

एफआईआर के बाद भी कार्रवाई नहीं
डॉ. रीना ने 8 जून 2023 को एफआईआर दर्ज करवाई, लेकिन पुलिस ने 2 सितंबर 2024 को केस को बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने 8 जनवरी 2025 को डीसीपी (वेस्ट) से मिलकर दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग की। केस फिर से खुला और जांच महिला अनुसंधान सेल को सौंपी गई।

जांच में आरोप सही पाए गए
जांच में यह साबित हो गया कि डॉ. रीना पूरी तरह से स्वस्थ थीं और उनका कोई इलाज नहीं हुआ था। साथ ही, नशा मुक्ति केंद्र भेजने के समय उन्होंने छुपे तौर पर वीडियो बना लिया था, जो सच्चाई साबित करने में मददगार रहा।

बाप-बेटे की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
रिटायर्ड अधिकारी गुंजन सक्सेना और उनका बेटा ध्रुव फिलहाल फरार हैं। दोनों ने कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।

संपत्ति पर जबरन कब्जा करने की कोशिश
डॉ. रीना ने बताया कि उन्होंने 1996 में अपने पैसों से प्लॉट खरीदा और उस पर मकान बनवाया था। तलाक के बाद 2021 में वह पुणे चली गई थीं। 2023 में बेटे के जन्मदिन पर जब वे जयपुर आईं, तो पता चला कि उनके पति और बेटा बिना इजाजत उनके मकान पर होटल बनवा रहे हैं।

एंबुलेंस बुलाकर भर्ती कराया गया
जब डॉ. रीना ने इसका विरोध किया तो पिता-पुत्र ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें भगवान महावीर नशा मुक्ति केंद्र में जबरन भर्ती करवा दिया। उस दौरान उनका मोबाइल भी छीन लिया गया, लेकिन उन्होंने किसी और मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो बना लिया था।

सच्चाई सामने आई
जांच में यह साफ हो गया कि डॉ. रीना न तो मानसिक रूप से बीमार थीं और न ही उन्हें किसी इलाज की जरूरत थी। पुलिस ने नशा मुक्ति केंद्र और संपत्ति दस्तावेजों की भी जांच की, जिसमें बिल्डर से हुआ गैरकानूनी एग्रीमेंट भी सामने आया।

यह मामला दर्शाता है कि कैसे संपत्ति के लिए अपनों द्वारा भी अन्याय हो सकता है, लेकिन सच्चाई और हिम्मत से इंसाफ पाया जा सकता है।

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