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पहलगाम हमला: टाइमिंग पर उठे सवाल, पीएम मोदी का सऊदी दौरा बीच में छोड़ना क्या दर्शाता है?

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय सऊदी अरब दौरा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज़ से अहम माना जा रहा था, लेकिन इसी बीच जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने अचानक माहौल बदल दिया। इस हमले में 26 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, और इसकी टाइमिंग ने जानकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

पीएम मोदी की त्वरित प्रतिक्रिया और दौरा अधूरा छोड़ने का फैसला

प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार दोपहर सऊदी अरब के जेद्दा शहर पहुँचे थे, जहाँ उन्हें रॉयल सलामी दी गई और F-15 फाइटर जेट्स द्वारा एस्कॉर्ट किया गया। यह दौरा ऐतिहासिक था क्योंकि जेद्दा में पिछले 40 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा था।

लेकिन शाम होते-होते पहलगाम में आतंकी हमले की खबर आई। पीएम मोदी ने तुरंत सोशल मीडिया के माध्यम से इस हमले की निंदा की और हमलावरों को सजा देने की बात कही। उसी रात यह सूचना आई कि प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब दौरा बीच में ही छोड़ने का निर्णय लिया है और वे भारत लौट रहे हैं।

भारत-सऊदी अरब के बीच हुए समझौते

दौरा छोटा होने के बावजूद भारत और सऊदी अरब ने चार प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए — जिनमें अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर शामिल हैं। यह दर्शाता है कि रणनीतिक रिश्तों को नुकसान नहीं होने दिया गया।

हमले की टाइमिंग पर विश्लेषकों की राय

पूर्व प्रोफेसर आफ़ताब कमाल पाशा का मानना है कि पीएम मोदी को वहीं रुककर सऊदी अरब जैसे देशों से सवाल पूछने चाहिए थे कि वे पाकिस्तान को आर्थिक मदद क्यों देते हैं, जब वह आतंकवाद को समर्थन देता है।

वहीं, जेएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद मुदस्सिर क़मर का मानना है कि प्रधानमंत्री ने सही निर्णय लिया। उनका कहना है कि “दुनिया के किसी भी देश में राष्ट्राध्यक्ष इसी तरह का कदम उठाता, अगर उसके देश में बड़ा आतंकी हमला होता।”

डॉ. मुदस्सिर ने हमले की टाइमिंग को सामान्य इत्तेफाक नहीं माना। उनके अनुसार, यह हमला प्रधानमंत्री के सऊदी दौरे के दौरान ही होना, संयोग नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचने की कोशिश?

ब्रिटिश मैगजीन ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने रिपोर्ट किया कि इस हमले का मकसद था कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय फोकस बनाना। इससे पहले भी ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जैसे:

  • 2000 में छत्तीसिंहपोरा हमला, बिल क्लिंटन के भारत दौरे से ठीक पहले।

  • 2002 में कालूचक हमला, अमेरिकी राजनयिक क्रिस्टिना रोका की भारत यात्रा के दौरान।

द हिंदू के अंतरराष्ट्रीय संपादक स्टैनली जॉनी ने भी हमले की टाइमिंग को अहम रणनीतिक संदेश बताया। उन्होंने कहा, “जब पाकिस्तानी सेना प्रमुख हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हैं और पीएम मोदी इस्लामी दुनिया के सबसे प्रभावशाली देश में होते हैं, तब यह हमला महज संयोग नहीं लग सकता।”

भारत-सऊदी संयुक्त बयान: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

भारत और सऊदी अरब ने संयुक्त बयान जारी कर पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की और स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई मजहब, नस्ल या संस्कृति नहीं होती। इस बयान में आतंकवाद के हर रूप को खारिज करने का संदेश दिया गया।

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