वॉशिंगटन डीसी: पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत से अपील की है कि वह इस हमले का जवाब इस तरीके से दे जिससे दक्षिण एशिया में कोई बड़ा संघर्ष न उभरे। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को भी आतंकियों के खिलाफ सहयोग की नसीहत दी है।
🗨️ “जवाब ज़रूरी है, लेकिन तनाव नहीं बढ़ना चाहिए”
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा, “हम भारत के साथ खड़े हैं, लेकिन यह भी ज़रूरी है कि जवाब ऐसा हो जिससे क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे। पाकिस्तान को चाहिए कि वह अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की पहचान करे और भारत के साथ सहयोग बढ़ाए।”
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका उम्मीद करता है कि पाकिस्तान इस संवेदनशील स्थिति में जिम्मेदारी से पेश आए और उन तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करे जो क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल रहे हैं।
⚠️ पाकिस्तान को चेतावनी और भारत के लिए समर्थन
जेडी वेंस का यह बयान उस समय आया है जब भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में एक बार फिर तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत हो गई थी और यह हाल के वर्षों में कश्मीर घाटी का सबसे भीषण हमला माना जा रहा है।
इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा में साफ कहा, “अगर किसी को लगता है कि यह हमला उनकी जीत है, तो वे भूल में हैं। यह मोदी का भारत है — बदला जरूर लिया जाएगा।” वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि “दोषियों को दुनिया के आखिरी कोने से ढूंढकर सज़ा दी जाएगी।”
🌍 अमेरिका की कूटनीतिक पहल जारी
उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ से अलग-अलग बातचीत की। उन्होंने दोनों देशों से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग की अपील की। रुबियो ने खासकर पाकिस्तान को आतंकी गतिविधियों पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
🚫 भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
हमले के बाद भारत सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। इनमें सिंधु जल समझौते की समीक्षा, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना, और राजनयिक स्तर पर सख्ती शामिल है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अब किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
📌 निष्कर्ष
जेडी वेंस का यह बयान दर्शाता है कि वैश्विक समुदाय भी इस घटना को गंभीरता से ले रहा है। अमेरिका संतुलित रुख अपनाते हुए एक तरफ भारत के जवाबी कार्रवाई के अधिकार को स्वीकार करता है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय शांति को भी प्राथमिकता देने की सलाह दे रहा है।
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