हरियाणा के फरीदाबाद से एक दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जहां भारतीय नस्ल की एक सामान्य सी दिखने वाली देसी बिल्ली ने एक विदेशी पशु चिकित्सक का दिल जीत लिया। नीदरलैंड की वेटनरी डॉक्टर इल्शा, जो बिल्लियों की बड़ी प्रशंसक हैं, भारत दौरे पर आईं और एक shelter विजिट के दौरान ‘भूरी’ नाम की इस बिल्ली से इतनी जुड़ गईं कि उन्होंने उसे गोद लेकर अपने देश ले जाने का फैसला कर लिया।
दिल्ली की गलियों से नीदरलैंड तक का सफर
‘भूरी’ को अगस्त 2024 में दिल्ली की एक गली से बेहद बीमार हालत में रेस्क्यू किया गया था। फरीदाबाद स्थित आस्था एनिमल हॉस्पिटल फाउंडेशन की टीम ने उसे इलाज के लिए अपने शेल्टर में लाकर कई महीनों तक उसका उपचार किया। धीरे-धीरे भूरी की हालत सुधरी और वह फिर से स्वस्थ हो गई।
डॉ. इल्शा ने दिसंबर 2024 में जब इस शेल्टर का दौरा किया, तो उन्होंने भूरी को देखा और तुरंत उससे एक भावनात्मक रिश्ता महसूस किया। कुछ ही पलों में उन्होंने उसे गोद लेने का फैसला कर लिया।
कागजी कार्रवाई के बाद ‘भूरी’ ने भरी उड़ान
फाउंडेशन की मदद से भूरी के सारे कागजात और स्वास्थ्य संबंधी औपचारिकताएं पूरी की गईं। गुरुवार शाम 6 बजे भूरी ने डॉ. इल्शा के साथ नीदरलैंड के लिए उड़ान भर ली। अब वह यूरोप की सर्द हवाओं में एक गर्म और स्नेहिल घर में अपना नया जीवन बिताएगी।
इंडी ब्रीड की बढ़ती लोकप्रियता
भूरी पहली नहीं है, जिसने भारतीय सीमाओं को पार किया हो। 2021 से 2023 के बीच तीन देसी कुत्ते—रॉकी, मोहिनी और लक्की—को भी इंग्लैंड में गोद लिया जा चुका है। धीरे-धीरे इंडी ब्रीड (भारतीय नस्ल) के जानवर विदेशी नागरिकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं, खासकर वे लोग जो जानवरों को पालने के साथ उन्हें बचाना भी एक सामाजिक जिम्मेदारी मानते हैं।
भूरी की कहानी एक प्रेरणा
‘भूरी’ की यह यात्रा बताती है कि प्यार और दया की कोई सरहद नहीं होती। एक समय जो बिल्ली सड़कों पर बेसहारा घूम रही थी, वह अब एक विदेशी देश में एक सुरक्षित, प्यार भरे वातावरण में अपना जीवन बिताएगी। यह न सिर्फ शेल्टर संस्थाओं की मेहनत का फल है, बल्कि पशु कल्याण के लिए वैश्विक सहयोग की एक मिसाल भी।
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