दोहा/तेहरान: ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर अमेरिका को कड़ा और दो-टूक संदेश दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि यदि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को उसके वैध परमाणु अधिकारों से वंचित करना है, तो तेहरान कभी भी झुकेगा नहीं। यह बयान अराघची ने कतर की राजधानी दोहा में आयोजित एक वार्ता के दौरान दिया।
🔹 परमाणु संवर्धन को लेकर सख्त रुख
अराघची ने ज़ोर देकर कहा कि यूरेनियम संवर्धन को लेकर ईरान अपने अधिकारों पर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है। उन्होंने अमेरिका की उस मांग को अस्वीकार कर दिया जिसमें “शून्य संवर्धन” की शर्त रखी गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में यह मांग दोहराई थी कि ईरान को किसी भी समझौते के तहत अपनी संवर्धन सुविधाओं को समाप्त करना होगा।
🔹 ईरान का परमाणु कार्यक्रम कैसा है?
ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। तेहरान का कहना है कि उसका मकसद ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा उपयोग के लिए परमाणु तकनीक को विकसित करना है, न कि परमाणु हथियारों का निर्माण।
🔹 अमेरिका और इज़रायल की चेतावनी
इस बीच, अमेरिका और इज़रायल ईरान पर दबाव बनाते आ रहे हैं कि वह परमाणु समझौते की नई शर्तों को माने, अन्यथा उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इज़रायल पहले ही संकेत दे चुका है कि यदि वार्ता विफल होती है तो वह ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अमेरिका का भी यही संकेत है कि समझौते की असफलता सैन्य टकराव की ओर ले जा सकती है।
🔹 ईरान की अंतिम चेतावनी
ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा,
“हम किसी भी वार्ता में अपने शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। यदि बातचीत का लक्ष्य पारदर्शिता और विश्वास बहाली है, तो हम तैयार हैं, लेकिन अगर यह हमारे अधिकारों को छीनने की कोशिश है, तो हम कभी पीछे नहीं हटेंगे।”
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