पाकिस्तान में जहां एक ओर अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा की खबरें सुर्खियाँ बनती हैं, वहीं दूसरी ओर हिंदू समुदाय की कई बेटियाँ ऐसे मुकाम पर पहुँच रही हैं जो सिर्फ उनके नहीं, पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। ये महिलाएं प्रशासनिक सेवा, पुलिस और न्यायिक पदों पर पहुँचकर न केवल सामाजिक बाधाओं को तोड़ रही हैं, बल्कि पाकिस्तान के सिस्टम में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
बलूचिस्तान की कशिश चौधरी: उम्मीद की नई रौशनी
बलूचिस्तान की 25 वर्षीय कशिश चौधरी ने पाकिस्तान पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षा पास कर असिस्टेंट कमिश्नर बनकर इतिहास रच दिया। अशांत माने जाने वाले प्रांत में यह जिम्मेदारी पाना आसान नहीं था, लेकिन कशिश ने तीन साल की कठिन तैयारी और अनुशासन से यह उपलब्धि हासिल की। वह अब प्रांत के विकास और अल्पसंख्यक समुदाय के सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बना चुकी हैं।
कराची की मनेश रोपेटा: कानून की रखवाली में नया चेहरा
2022 में मनेश रोपेटा ने कराची की पहली हिंदू महिला पुलिस अधीक्षक बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उनका यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि समर्पण और नेतृत्व की भावना किसी जाति या धर्म की मोहताज नहीं होती।
पुष्पा कुमारी कोहली: सिंध पुलिस की दृढ़ आवाज
कराची में उप-निरीक्षक के रूप में सेवा दे रहीं पुष्पा कोहली का मानना है कि समाज की सोच से परे जाकर खुद को साबित करने की क्षमता हर हिंदू महिला में है। अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली कोहली ने सिंध पुलिस की लोक सेवा परीक्षा भी पास की और बताया कि उनकी तरह कई लड़कियाँ आगे आने को तैयार हैं — ज़रूरत है तो बस अवसर और समर्थन की।
सुमन पवन बोदानी: न्यायपालिका में भी कदम
सिंध प्रांत के शाहदादकोट से आने वाली सुमन पवन बोदानी ने 2019 में सिविल जज के रूप में शपथ ली थी। यह उपलब्धि उनके लिए नहीं, बल्कि उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है जो पारंपरिक सीमाओं को लांघने का हौसला रखती हैं।
सपनों की उड़ान को मिला समर्थन
सिंध के वरिष्ठ नेता रमेश कुमार वंकवानी का कहना है कि अब हिंदू लड़कियाँ शिक्षा और करियर को लेकर पहले से कहीं ज़्यादा जागरूक और सक्रिय हैं। उन्होंने गर्व के साथ कहा, “आज हमारे समाज की बेटियाँ डॉक्टर, अधिकारी और जज बन रही हैं — यही असली प्रगति है।”
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