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हार्दिक पांड्या के ‘नो-लुक सिक्स’ के पीछे का विज्ञान: कैसे उनका घुमावदार बल्ला बनाता है उन्हें खास

 

भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या के ‘नो-लुक सिक्स’ क्रिकेट प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इन शॉट्स के पीछे उनकी ताकत और तकनीक के साथ-साथ उनके विशेष रूप से डिजाइन किए गए घुमावदार बल्ले की भी अहम भूमिका है।

हार्दिक का बल्ला पारंपरिक फ्लैट बल्लों से अलग है। इसमें सामने की ओर एक विशेष घुमाव (कर्व) होता है, जो गेंद के संपर्क बिंदु को बढ़ाता है। यह घुमाव बल्ले के ‘स्वीट स्पॉट’ को बड़ा बनाता है, जिससे गेंद बल्ले से टकराने के बाद अधिक दूरी तक जाती है। बल्ले का यह डिज़ाइन 1990 के दशक में सचिन तेंदुलकर की पहल पर शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपने बल्ले में पहले से ही एक ‘स्वीट स्पॉट’ बनाने की मांग की थी।

हार्दिक के बल्ले का डिज़ाइन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के शोधकर्ताओं, मेरठ स्थित एसजी (Sanspareils Greenlands) कंपनी के इंजीनियरों और हार्दिक स्वयं के सहयोग से विकसित किया गया है। इस बल्ले में लगभग 200% अधिक घुमाव होता है, जो गेंद को 45 डिग्री के आदर्श कोण पर भेजने में मदद करता है। यह कोण गेंद को हवा में परिपूर्ण पराबोला पथ पर भेजता है, जिससे वह अधिकतम दूरी तय करती है।

हार्दिक पांड्या SG कंपनी के HP 33 मॉडल का उपयोग करते हैं, जो ग्रेड 1 इंग्लिश विलो से बना होता है। इस बल्ले की विशेषताएं हैं: बड़ा स्वीट स्पॉट, संतुलित वजन वितरण, और पारंपरिक राउंड केन हैंडल। यह बल्ला विशेष रूप से पावर-हिटर्स के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो सीमित ओवरों के प्रारूप में आक्रामक बल्लेबाजी करना पसंद करते हैं।

 

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