जेरूसलम/गाजा: गाजा पट्टी इस वक्त इतिहास के सबसे गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रही है। लगातार बमबारी, सीमाओं की नाकेबंदी और खाद्य आपूर्ति की पूरी तरह बंदी ने इलाके को भुखमरी की कगार पर पहुँचा दिया है। इस हालात के बीच सवाल उठता है—इजरायल ने गाजा की जरूरी आपूर्ति आखिर क्यों रोक रखी है?
गाजा में हालात कैसे हैं?

7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर हुए हमले के बाद शुरू हुई जंग अब 19 महीनों में सबसे भयानक रूप ले चुकी है। फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, अब तक 53,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
गाजा का स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह चरमरा चुका है। दवाइयों की भारी कमी है और कैंसर का इलाज करने वाला अंतिम अस्पताल भी बंद हो चुका है। खाने-पीने की चीजें न मिलने के कारण कई क्षेत्रों में लोग भूख से बेहाल हैं। UN और अन्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि गाजा में बड़े पैमाने पर भुखमरी फैल सकती है।
75 दिनों से बंद है आपूर्ति – क्यों?
इजरायल ने गाजा के लिए जरूरी सामानों की आपूर्ति करीब 75 दिनों से रोक रखी है। इसमें खाने-पीने का सामान, दवाइयां और पानी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि गाजा की पूरी आबादी अब बाहरी मदद पर निर्भर हो चुकी है।
तो आखिर इजरायल ने सप्लाई क्यों रोकी है?
इजरायल की दलील है कि गाजा में भेजी जा रही सहायता अक्सर हमास के हाथ लग जाती है। वह आरोप लगाता है कि हमास मानवीय सहायता को हथिया कर अपने सैन्य संसाधनों को मजबूत करता है। इसीलिए, इजरायल फिलहाल पारंपरिक आपूर्ति के रास्तों को बंद करके एक नई प्रणाली पर काम कर रहा है, जिसमें सहायता वितरण पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
क्या है इजरायल का ‘नया प्लान’?
इजरायल अमेरिका और कुछ अन्य साझेदारों के साथ मिलकर एक वैकल्पिक राहत वितरण प्रणाली पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मदद सीधे नागरिकों तक पहुँचे, न कि हथियारबंद समूहों तक।
हालांकि, राहत एजेंसियों का कहना है कि यह प्रणाली जमीन पर लागू करना मुश्किल होगा और इससे मानवीय जरूरतें पूरी नहीं हो पाएंगी।
भविष्य क्या दिखा रहा है?
इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हाल ही में और बड़े सैन्य ऑपरेशन की चेतावनी दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया हवाई हमले एक बड़े ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी के संकेत हैं।
हमास के कब्जे में अब भी कई बंधक हैं, जिनमें कुछ के जीवित होने की उम्मीद की जा रही है। नेतन्याहू का कहना है कि सैन्य दबाव ही बंधकों की रिहाई का एकमात्र रास्ता है।
मानवता बनाम रणनीति
ऑक्सफैम और यूनिसेफ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने गाजा की स्थिति को “मानवाधिकारों की गंभीर अनदेखी” बताया है। उनका कहना है कि दुनिया धीरे-धीरे इस त्रासदी से मुंह मोड़ रही है, जबकि ज़रूरत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक स्वर में समाधान की ओर बढ़े।
निष्कर्ष
गाजा में जारी संकट मानवीय संवेदनाओं और सुरक्षा रणनीतियों के बीच संघर्ष बन गया है। एक तरफ इजरायल की सुरक्षा चिंताएं हैं, तो दूसरी तरफ लाखों आम लोगों की ज़िंदगियाँ दांव पर हैं। जब तक किसी निष्पक्ष, सुरक्षित और मानवीय रास्ते से आपूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक गाजा की स्थिति बद से बदतर होती जाएगी।
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