भुज, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर आतंकवाद और उसके संरक्षक देशों को कड़ी चेतावनी दी है। गुजरात के भुज जिले में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि “अगर चैन की जिंदगी पसंद है तो रोटी खाओ, नहीं तो भारत की गोली से सामना करने को तैयार रहो।”
ऑपरेशन सिंदूर का फिर से जिक्र
प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए साफ किया कि भारत अब किसी भी आतंकवादी हमले को सहन नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हमने आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। जो भारत के निर्दोष लोगों का खून बहाएगा, उसे उसी की भाषा में जवाब मिलेगा।”
सेना को मिली खुली छूट
पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने भारतीय सेना को हर आवश्यक कार्रवाई के लिए पूरी छूट दे रखी है। “हमने पाकिस्तान को 15 दिन का समय दिया था कि वह आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाए, लेकिन लगता है कि आतंकवाद ही अब उनकी पहचान बन चुका है। जब वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो हमने अपने सुरक्षाबलों को खुली छूट दे दी,” उन्होंने कहा।
पाकिस्तान की जनता से की अपील
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की जनता से भी अपील की। उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि पाकिस्तान के लोग खुद आगे आएं और अपने देश को आतंकवाद के जहर से मुक्त करें। खासकर वहां के युवाओं को यह समझना होगा कि बंदूक नहीं, किताब ही भविष्य है।”
भुज में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 53,400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और कई का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि कच्छ की धरती से उनका गहरा नाता है और यह क्षेत्र उनके लिए केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।
कच्छ की महिलाओं ने दिया ‘सिंदूर का पौधा’
प्रधानमंत्री ने एक भावनात्मक क्षण का जिक्र करते हुए कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान भुज की वीर महिलाओं ने जब रनवे की मरम्मत कर भारतीय सेना की मदद की थी, तब उनकी वीरता ने इतिहास रच दिया था। उन्होंने कहा, “आज उन्हीं बहादुर महिलाओं ने मुझे आशीर्वाद दिया और सिंदूर का पौधा भेंट किया, जिसे मैं दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर लगाऊंगा।”
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण सिर्फ विकास की योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के स्पष्ट रुख को भी एक बार फिर दुनिया के सामने रख दिया। उनकी शब्दावली जितनी आक्रामक थी, उतनी ही संदेशवाहक भी—शांति का रास्ता खुला है, लेकिन अगर कोई भारत की तरफ बुरी नजर डालेगा, तो जवाब भी उसी स्तर का मिलेगा।
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