इस्लामाबाद/लाचिन: भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद पाकिस्तान में घबराहट साफ देखी जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत से संवाद की अपील की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए दोनों देशों को मिलकर कश्मीर, आतंकवाद और जल विवाद जैसे मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए।
त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन में उठाई बात
शरीफ ने यह टिप्पणी अजरबैजान के लाचिन में आयोजित पाकिस्तान-तुर्किये-अजरबैजान त्रिपक्षीय सम्मेलन में की, जहां उनके साथ तुर्किये के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव भी मौजूद थे। सम्मेलन के दौरान शरीफ ने कश्मीर मुद्दे को एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के हवाले से उठाया और कहा कि इसका समाधान कश्मीरी जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए।
बातचीत का पुराना राग फिर दोहराया
यह बीते एक सप्ताह में शरीफ की दूसरी ऐसी अपील है। इससे पहले उन्होंने ईरान के दौरे के दौरान भी भारत के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत की पेशकश की थी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर भी गंभीरता से भारत से संवाद करने को तैयार है, यदि भारत इसके लिए तैयार हो।
भारत की स्पष्ट नीति – सिर्फ आतंकवाद और पीओके पर होगी बात
हालांकि भारत पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि पाकिस्तान से बातचीत केवल आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की वापसी जैसे मुद्दों पर ही हो सकती है। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि सीमा पार आतंकवाद को बंद किए बिना किसी प्रकार की शांति वार्ता संभव नहीं है।
व्यापार और सिंधु जल संधि का भी जिक्र
अपने भाषण में शरीफ ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को पुनः शुरू करने की भी इच्छा जताई। उन्होंने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के फैसले की आलोचना करते हुए इसे पाकिस्तान की जनता के लिए एक बड़ा संकट बताया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का पड़ा असर
भारत की ओर से हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमलों के बाद से ही पाकिस्तान के सुर बदले नजर आ रहे हैं। इन हमलों की पृष्ठभूमि में 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को बताया जा रहा है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।
भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से 8 से 10 मई के बीच सीमा पार गोलीबारी की घटनाएं हुईं, जिनका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया। इसके बाद 10 मई को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में सीमाई तनाव को नियंत्रित करने की सहमति बनी।
निष्कर्ष:
भारत के आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैये और सफल सैन्य अभियानों के बाद पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री शरीफ अब बातचीत और शांति की अपीलें कर रहे हैं, लेकिन भारत का रुख साफ है – बात सिर्फ आतंकवाद और राष्ट्रीय हितों पर होगी, बाकी सब बाद में।
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