ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचते हुए कई ऐसे परमाणु परीक्षण किए हैं जो सीधे-सीधे हथियार निर्माण से जुड़े हैं। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की हालिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में खलबली मचा दी है।
गुप्त इम्प्लोजन टेस्ट और संवेदनशील डिज़ाइनों का खुलासा
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कम से कम 9 परमाणु बमों के डिजाइन तैयार किए हैं और तीन अलग-अलग गुप्त स्थानों पर रेडियोएक्टिव सामग्री को संग्रहीत किया गया।
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IAEA के दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि 2003 में दो इम्प्लोजन परीक्षण किए गए—15 फरवरी और 3 जुलाई को।
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ये वही तकनीक है जो परमाणु बम के केंद्र को विस्फोट के लिए तैयार करती है और जिसका कोई असैन्य उपयोग नहीं है।
गुप्त ठिकानों पर मिला रेडियोएक्टिव सबूत
IAEA ने अपनी जांच में ईरान की वरामिन नामक साइट पर कई रेडियोधर्मी और कैमिकल सामग्रियों के अवशेष पाए, जिनमें शामिल हैं:
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यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड गैस (UF6)
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रेडिएशन डिटेक्टर
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हाइड्रोफ्लोरिक एसिड
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और अन्य परमाणु-प्रसंस्करण में उपयोग होने वाले यंत्र
इन सभी का उपयोग परमाणु हथियार बनाने की प्रक्रिया में होता है। आश्चर्य की बात यह है कि ईरान ने खुद इन कंटेनरों को “सबसे अधिक संदूषित” बताया, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया कि जानबूझकर इन्हें छिपाया गया।
तुर्कुज़ाबाद और गायब यूरेनियम की गुत्थी
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2009 से 2018 के बीच ईरान ने एक और गुप्त स्थल तुर्कुज़ाबाद में रेडियोएक्टिव सामग्री को छिपाकर रखा।
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साथ ही, Jaber Ibn Hayan नामक परमाणु प्रयोगशाला से गायब हुए यूरेनियम का भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिसे इसी गुप्त परियोजना का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान डील संकट में, इज़राइल का रुख सख्त
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक नई परमाणु डील की चर्चाएं अंतिम दौर में हैं।
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लेकिन इस रिपोर्ट ने डील की संभावनाओं को बड़ा झटका दिया है।
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इज़राइल पहले ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है और इस रिपोर्ट ने उसकी आशंकाओं को बल दे दिया है।
IAEA ने जताई नाराज़गी, UN में उठ सकता है मामला
IAEA ने ईरान पर यह आरोप लगाया है कि उसने निरीक्षण के दौरान बार-बार भ्रामक या अपूर्ण जानकारी दी।
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रिपोर्ट की समीक्षा करने वाले इंटरनेशनल थिंक टैंक Institute for Science and International Security ने इसे गंभीर माना है।
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संस्था के प्रमुख डेविड अलब्राइट ने मांग की है कि अब इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
ईरान की परमाणु गतिविधियों पर वर्षों से शक जताया जाता रहा है, लेकिन इस बार IAEA की रिपोर्ट ने उसे ठोस रूप में दुनिया के सामने रखा है। अगर यह निष्कर्ष सही साबित होते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए यह एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
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