वाशिंगटन/इस्लामाबाद: अमेरिका में एक बार फिर ओसामा बिन लादेन से जुड़ा पुराना जख्म ताजा हो गया है। इस बार निशाने पर है पाकिस्तान, और खासकर वह डॉक्टर जिसने अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA को उस आतंकी का पता लगाने में मदद की थी। अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान पर साफ कहा है—“अगर संबंध बेहतर चाहिए, तो सबसे पहले डॉक्टर अफरीदी को रिहा करो।”
🔥 बिलावल भुट्टो से सीधी बात
हाल ही में अमेरिका पहुंचे पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य ब्रैड शेरमैन ने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को डॉ. शकील अफरीदी को रिहा करना चाहिए। शेरमैन के मुताबिक, यह उन हजारों अमेरिकी परिवारों के लिए न्याय का प्रतीक होगा जिन्होंने 9/11 हमलों में अपने करीबियों को खोया।
🕵️♂️ कौन हैं डॉक्टर अफरीदी और क्या था उनका रोल?
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डॉ. शकील अफरीदी, पाकिस्तान के खैबर क्षेत्र में कार्यरत एक सरकारी डॉक्टर थे।
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उन्हें एक नकली हेपेटाइटिस बी टीकाकरण अभियान चलाने को कहा गया, जिसका मकसद था एबटाबाद में रह रहे लोगों के डीएनए सैंपल लेना।
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माना जाता है कि इसी योजना की मदद से CIA को बिन लादेन की मौजूदगी की पुष्टि हुई।
📅 2 मई 2011: अमेरिका का ऐतिहासिक हमला
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अमेरिका के नेवी सील कमांडो ने पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में एक रहस्यमयी घर पर छापा मारा।
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यहीं पर दुनिया का सबसे वांछित आतंकी ओसामा बिन लादेन मारा गया।
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इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरा और उसकी भूमिका पर सवाल उठाए गए।
🚨 डॉ. अफरीदी को क्यों मिली जेल की सजा?
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ऑपरेशन के कुछ ही हफ्तों बाद, 23 मई 2011 को डॉ. अफरीदी को पाकिस्तान सरकार ने गिरफ्तार कर लिया।
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उन पर देशद्रोह और आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम को फंडिंग के आरोप लगे।
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2012 में उन्हें 33 साल की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में 23 साल कर दिया गया।
🇺🇸 अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्तों में फिर तनाव
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ब्रैड शेरमैन जैसे नेताओं की बयानबाजी साफ संकेत देती है कि अफरीदी की रिहाई अमेरिका के लिए अब भी एक संवेदनशील मुद्दा है।
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अमेरिकी प्रशासन कई बार पाकिस्तान से राजनयिक स्तर पर अनुरोध कर चुका है, लेकिन अफरीदी आज भी जेल में बंद हैं।
🧾 निष्कर्ष
बिलावल भुट्टो का अमेरिका दौरा भारत पर तीखी टिप्पणियों से शुरू हुआ था, लेकिन उन्हें जवाब उसी देश से मिला जिसने पाकिस्तान की धरती पर घुसकर अपने दुश्मन को खत्म किया। अब दुनिया एक बार फिर पाकिस्तान की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है—क्या एक डॉक्टर जिसने आतंक के खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत दिखाई, वो आज भी सलाखों के पीछे रहेगा?
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