अमेरिका के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक राजनीति और सुरक्षा विश्लेषकों को चौंका दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला ने आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में विवादास्पद भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान की आतंक के खिलाफ कार्रवाई में भूमिका की तारीफ़ की है।
भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध जरूरी: कुरिल्ला
जनरल कुरिल्ला ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष बोलते हुए कहा कि अमेरिका को भारत और पाकिस्तान, दोनों के साथ अपने संबंध संतुलन के साथ बनाए रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई “बाइनरी विकल्प” नहीं हो सकता जिसमें एक देश से रिश्ते हों और दूसरे से न हों। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विदेश नीति को देशों के गुण-दोषों के आधार पर परखा जाना चाहिए।
आतंकवाद से लड़ाई में पाकिस्तान को बताया “साझेदार”
सबसे ज्यादा चर्चा का विषय तब बना जब जनरल कुरिल्ला ने पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ अमेरिका का “साझेदार” करार दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकी संगठन ISIS-K के खिलाफ कई अहम कार्रवाइयाँ की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने इस सहयोग से ISIS-K के पांच शीर्ष आतंकियों को पकड़ा है।
असीम मुनीर और शरीफुल्लाह का ज़िक्र
जनरल कुरिल्ला ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का नाम लेते हुए दावा किया कि मुनीर ने एक फोन कॉल के दौरान उन्हें सूचित किया था कि उन्होंने ISIS-K के आतंकी मोहम्मद शरीफुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे बाद में अमेरिका को सौंप दिया गया। यह वही शरीफुल्लाह है जिस पर 2021 में काबुल एयरपोर्ट हमले में शामिल होने का आरोप है, जिसमें 13 अमेरिकी सैनिकों सहित 160 से अधिक लोग मारे गए थे।
क्या यह बयान वास्तविकता से मेल खाता है?
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान पर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वह आतंकियों को पनाह देता है और रणनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करता है। ऐसे में एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी द्वारा पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ सहयोगी कहना कई सवालों को जन्म देता है।
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